चुनाव आयोग ने हाल ही में बीएलओ (बोलिंग लेवल अधिकारियों) की मौत और आत्महत्या के मामलों को लेकर गंभीरता जताई है। आयोग ने इस विषय में राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) से रिपोर्ट मांगी है। यह कदम मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान बीएलओ की मौत और आत्महत्या की घटनाओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है। आयोग ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों की स्थिति पर नजर रखी है, जहां बीएलओ की मौत और आत्महत्या की घटनाएं सामने आई हैं।
बीएलओ की मौत
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, इन मौतों को काम के दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे आयोग ने गहरी हैरानी जताई है। बीएलओ का कार्य अत्यंत जिम्मेदारी वाला माना जाता है, क्योंकि उन्हें मतदाता सूची में नामांकन, सुधार और अन्य प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करना होता है। हाल के मतदाता सूची पुनरीक्षण में यह देखा गया कि काम के अत्यधिक दबाव के चलते कुछ राज्यों में बीएलओ की मौत और आत्महत्या जैसी घटनाएं हुईं, जो न केवल अधिकारियों बल्कि आम जनता के लिए भी चिंता का विषय हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिहार इस मामले में अलग उदाहरण प्रस्तुत करता है। बिहार में मतदाता सूची का SIR (Special Intensive Revision) कम समय में संपन्न हुआ, लेकिन वहां कोई बीएलओ मौत या आत्महत्या की घटना दर्ज नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि यह दर्शाता है कि काम के दबाव के बावजूद समुचित व्यवस्थाओं और प्रबंधन से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। बिहार की इस स्थिति ने अन्य राज्यों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है।
राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा का विषय
बीएलओ की मौत और आत्महत्या की घटनाओं ने राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को उठाया था और चुनाव आयोग से इसे गंभीरता से देखने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि बीएलओ के काम का बोझ और समयसीमा का दबाव उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
चुनाव आयोग की ओर से मांगी गई रिपोर्ट
चुनाव आयोग की ओर से मांगी गई रिपोर्ट में हर राज्य को यह बताना है कि बीएलओ की मौत या आत्महत्या की घटनाओं का कारण क्या रहा, क्या उन्हें काम के दबाव से जोड़ा जा सकता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-सी योजनाएं बनाई गई हैं। आयोग की यह पहल यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है कि मतदाता सूची प्रक्रिया सुरक्षित और सुचारु तरीके से पूरी हो।
मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा
इस बीच आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में बीएलओ के कार्यभार और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आयोग अधिकारियों का मानना है कि बीएलओ की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान दिए बिना चुनावी प्रक्रिया का सुचारु संचालन कठिन हो सकता है। बिहार का उदाहरण इस बात का प्रमाण है कि उचित योजना और समय प्रबंधन से काम का दबाव कम किया जा सकता है और कर्मचारियों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

