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Cylinder Blast in Varanasi: लहरतारा में सिलेंडर फटने से मकान जमींदोज, मलबे में दबकर भाई-बहन की मौत

Cylinder Blast in Varanasi: धर्मनगरी वाराणसी के मंडुवाडीह थाना क्षेत्र में मंगलवार की सुबह एक हृदयविदारक घटना सामने आई। लहरतारा पुल के पास स्थित एक तंग गली में रसोई गैस सिलेंडर के जोरदार धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया। इस भीषण विस्फोट के कारण एक रिहायशी मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गया, जिसकी चपेट में आने से एक ही परिवार के दो सदस्यों की जान चली गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

लहरतारा धमाके की गूँज और मलबे में तब्दील हुआ रिहायशी मकान

मंगलवार की सुबह जब लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, तभी अचानक एक कान फोड़ू धमाके ने शांति भंग कर दी। स्थानीय निवासियों के अनुसार, धमाका इतना शक्तिशाली था कि पल भर में पक्का मकान मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे तो देखा कि घर की छत और दीवारें गिर चुकी थीं और परिवार के चार सदस्य मलबे के नीचे दबे हुए थे। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी।

गैस रिसाव के कारण हुआ विनाशकारी सिलेंडर विस्फोट (LPG Cylinder Blast)

घटना की सूचना मिलते ही एडीसीपी वरुणा नीतू कात्यायन, एडीएम आलोक वर्मा और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम जांच के लिए मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच और अधिकारियों के बयान के अनुसार, यह हादसा गैस सिलेंडर से हो रहे रिसाव (Gas Leakage) के कारण हुआ। बताया जा रहा है कि परिवार की बुजुर्ग महिला गिरजा देवी रसोई में खाना बना रही थीं, तभी अचानक रिसाव की वजह से गैस ने आग पकड़ ली और सिलेंडर बम की तरह फट गया। जर्जर मकान इस दबाव को झेल नहीं सका और भरभरा कर गिर पड़ा।

मृतकों की पहचान और बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में जारी घायलों का उपचार

इस दर्दनाक हादसे में मलबे से निकाले गए सभी चार लोगों को आनन-फानन में बीएचयू (BHU) ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद दो युवाओं को नहीं बचाया जा सका। मृतकों की पहचान 27 वर्षीय प्रीति और 30 वर्षीय ओम कुमार चौधरी के रूप में हुई है, जो आपस में भाई-बहन थे। इस घटना ने पूरे परिवार को उजाड़ कर रख दिया है। वहीं, 31 वर्षीय अमन चौधरी और 60 वर्षीय गिरजा देवी की स्थिति गंभीर बनी हुई है और वे अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

प्रशासनिक मुस्तैदी और मलबे के बीच चला रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे के बाद इलाके में अफरातफरी और कोहराम का माहौल व्याप्त हो गया। पुलिस और राजस्व विभाग की टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घेराबंदी की और फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य एकत्रित किए। एडीसीपी नीतू कात्यायन ने पुष्टि की कि गिरजा देवी अपने तीन बच्चों के साथ इस पुराने मकान में रहती थीं। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या सिलेंडर में कोई तकनीकी खराबी थी या यह मानवीय चूक का परिणाम है। इस बीच, मृतकों के परिजनों में मातम छाया हुआ है और स्थानीय लोग प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं।

शहरी क्षेत्रों में गैस सुरक्षा और जर्जर भवनों का बढ़ता खतरा

वाराणसी की इस घटना ने एक बार फिर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में गैस सुरक्षा मानकों और पुराने, जर्जर मकानों की स्थिति पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। संकरी गलियों के कारण एम्बुलेंस और राहत दल को पहुंचने में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर गैस पाइप और रेगुलेटर की जांच न करना ऐसे बड़े हादसों को निमंत्रण देता है। फिलहाल, मंडुवाडीह पुलिस मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है।

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