LPG Crisis: वैश्विक तनाव और युद्ध के बीच भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है। जहां एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा के मुद्दे पर अपने करीबी सहयोगियों से निराशा हाथ लगी है, वहीं भारत के दो विशाल एलपीजी टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ सुरक्षित रूप से इस संवेदनशील मार्ग को पार कर भारतीय तटों की ओर बढ़ रहे हैं। यह घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और भारत की सक्रिय विदेश नीति के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
जापान और ऑस्ट्रेलिया ने सुरक्षा मिशन से खींचे हाथ
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मित्र देशों—जापान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन—से सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग की अपील की थी। हालांकि, अमेरिका के इस दबाव के बावजूद इन विकसित देशों ने फिलहाल अपनी नौसेना तैनात करने से इनकार कर दिया है। ट्रंप प्रशासन चाहता था कि ये देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजें, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रस्ताव को ठंडी प्रतिक्रिया मिली है।
जापान, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया का रुख
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाईची ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी वर्तमान में होर्मुज में कोई नौसैनिक जहाज भेजने की योजना नहीं है। इसी तरह, ऑस्ट्रेलिया की मंत्री कैथरीन किंग ने भी साफ किया कि उन्हें कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है और वे कोई जहाज तैनात नहीं करेंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस मुद्दे पर ट्रंप से चर्चा तो की है, लेकिन सैन्य भागीदारी के बजाय कूटनीतिक समन्वय पर अधिक जोर दिया है। दक्षिण कोरिया भी इस मामले में ‘सावधानीपूर्वक समीक्षा’ की नीति अपना रहा है।
भारत की ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ मिशन की सफलता
दुनिया भर में जारी युद्ध के बीच भारत के लिए राहत की बड़ी खबर यह है कि ‘शिवालिक एलपीजी कैरियर’ (Shivalik LPG Carrier) आज मुंद्रा पोर्ट पर दस्तक देने वाला है। इसके तुरंत बाद मंगलवार को ‘नंदा देवी एलपीजी कैरियर’ (Nanda Devi LPG Carrier) के कांडला पोर्ट पहुंचने की उम्मीद है। इन दोनों जहाजों ने सफलतापूर्वक सबसे चुनौतीपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पार कर लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी सरकार की कूटनीतिक सक्रियता के कारण ही ये जहाज बिना किसी बाधा के भारत की सीमा में प्रवेश कर सके हैं।
92,712 मीट्रिक टन एलपीजी की खेप
इन दोनों जहाजों में कुल मिलाकर लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी (LPG) लदी हुई है। इतनी बड़ी मात्रा में रसोई गैस का सुरक्षित भारत पहुंचना देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कूटनीतिक स्तर पर किए गए निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सफल हो रहा है। यह सफलता वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और सुरक्षित व्यापारिक मार्गों को सुनिश्चित करने की क्षमता को प्रमाणित करती है।

