TMC Candidate List: पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस के 291 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। इस घोषणा के साथ ही सीएम ने स्पष्ट कर दिया कि यह केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि ‘बंगाल के अस्तित्व की लड़ाई’ है।
ममता बनर्जी का चुनावी शंखनाद
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए आत्मविश्वास से लबरेज होकर जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि 2026 के इन विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस 226 से ज्यादा सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी। ममता ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए तंज कसा कि आयोग भाजपा के पक्ष में ‘खेल’ खेल रहा है, उन्हें सीधे तौर पर विपक्षी दल के लिए प्रचार करना चाहिए।
भवानीपुर से दीदी की उम्मीदवारी
टीएमसी प्रमुख ने स्वयं भवानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की है। पार्टी की रणनीति साझा करते हुए बताया गया कि कुल 294 सीटों में से टीएमसी 291 पर चुनाव लड़ेगी, जबकि बाकी 3 सीटें दार्जिलिंग हिल्स में अनित थापा की ‘भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा’ (BGPM) के लिए छोड़ी गई हैं। अभिषेक बनर्जी ने उम्मीदवारों के सामाजिक समीकरण स्पष्ट करते हुए बताया कि सूची में 52 महिलाएं, 95 अनुसूचित जाति/जनजाति (SC-ST) और 47 अल्पसंख्यक उम्मीदवार शामिल हैं।
स्टार पावर और पुराने चेहरों का संगम
तृणमूल की इस उम्मीदवार सूची में प्रमुख चेहरों को जगह दी गई है। श्यामपुकुर से शशि पांजा, कोलकाता पोर्ट से फिरहाद हकीम और कमरहाटी से मदन मित्रा फिर से मैदान में हैं। पार्टी ने ग्लैमर और अनुभव का संतुलन बनाते हुए करीमपुर से सोहम चक्रवर्ती को उतारा है, वहीं हाबरा से ज्योतिप्रिया मलिक को टिकट दिया गया है। खरदाह सीट से पूर्व पत्रकार देवदीप पुरोहित को मौका देकर पार्टी ने नए खून को भी तरजीह दी है।
केंद्र बनाम बंगाल
ममता बनर्जी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला करार दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए सवाल किया कि अगर उन्हें लोकतंत्र पर भरोसा है, तो बंगाल पर बार-बार आक्रमण क्यों हो रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राज्य की शक्तियां छीनने का प्रयास किया है, लेकिन वे जनता की ताकत नहीं छीन सकते।
निष्पक्ष मुकाबले की अपील
मुख्यमंत्री ने भाजपा को खुली चुनौती देते हुए कहा कि एजेंसियां (ED/CBI) और गैस संकट जैसे कृत्रिम दबाव पैदा किए बिना मैदान में आएं। उन्होंने कहा, “आइए शांति और तहजीब के साथ लड़ें।” ममता ने स्पष्ट किया कि दिल्ली की सत्ता बंगाल को नहीं जीत पाएगी क्योंकि यह राज्य की अस्मिता और पहचान की रक्षा का संकल्प है।

