TMC Political Crisis: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में एक बहुत बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। पार्टी के 19 सांसदों द्वारा बगावत किए जाने के बाद टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) ओम बिरला को एक बेहद महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। इस चिट्ठी के जरिए उन्होंने मांग की है कि संसद के भीतर तृणमूल कांग्रेस को केवल एक ही राजनीतिक दल के रूप में स्वीकार किया जाए और पार्टी के अधिकृत नेताओं के अलावा किसी भी अन्य धड़े को कोई तवज्जो न दी जाए।
अभिषेक बनर्जी का लोकसभा अध्यक्ष को पत्र
अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजे अपने आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया है कि संसद में तृणमूल कांग्रेस को एक अकेली और अखंड राजनीतिक पार्टी माना जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन में टीएमसी का प्रतिनिधित्व केवल और केवल उसके सही तरीके से अधिकृत नेता (Authorized Leader) और पार्टी व्हिप (सचेतक) के माध्यम से ही होना चाहिए। 19 लोकसभा सांसदों की इस बड़ी बगावत के बाद टीएमसी नेतृत्व पूरी तरह से सतर्क हो गया है और पार्टी को टूटने से बचाने के लिए यह त्वरित कानूनी व संसदीय कदम उठाया गया है।
बागी गुट की मान्यता पर रोक की मांग
पार्टी के भीतर उभरे असंतोष और आंतरिक कलह के बीच अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर से बागी सांसदों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अपील की है। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट शब्दों में लिखा है, ‘संसद के भीतर किसी भी कथित तौर पर अलग हुए ग्रुप, धड़े या गुट को किसी भी प्रकार की पहचान, स्टेटस, वित्तीय या विधायी सुविधा देने से पूरी तरह मना करें।’ टीएमसी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वे पार्टी के नाम पर किसी भी अन्य आंतरिक गुट को पैर पसारने की अनुमति नहीं देंगे।
संसदीय नियमों के तहत पक्ष रखने की अपील
लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने यह भी अनुरोध किया है कि बागी धड़े या टीएमसी से जुड़े किसी भी विषय पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले मूल तृणमूल कांग्रेस को अपनी बात और अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर (Right to be heard) दिया जाए। उन्होंने कहा कि “विधिवत अधिकृत नेता और सचेतक” के जरिए ही पार्टी की वास्तविक आवाज को सदन में मान्यता दी जानी चाहिए, ताकि संसदीय मर्यादा और लोकतांत्रिक नियमों का उल्लंघन न हो।
कीर्ति आजाद और सागरिका घोष पहुंचे अध्यक्ष के निवास
अभिषेक बनर्जी का यह महत्वपूर्ण पत्र लेकर टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष सीधे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास पर पहुंचे और उन्हें यह आवेदन सौंपा। इस मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, ‘यह कानूनी रूप से बिल्कुल साफ है।
सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने अपने फैसलों में स्पष्ट किया है और संविधान की 10वीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के आर्टिकल 4 में भी इसका साफ जिक्र है कि अब मूल पार्टी से अलग कोई विभाजन (Split) नहीं हो सकता। महाराष्ट्र में जो हुआ, वह पूरी तरह गलत था। इसलिए, हम इस गंभीर मामले में यह अर्जी लेकर आए हैं। हमें पूरा भरोसा है कि स्पीकर महोदय नियमों के मुताबिक ही न्याय करेंगे।’

