Maharashtra News: केंद्रीय रामदास अठावले ने विपक्षी दलों को छोड़कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) या उसके सहयोगी दलों में शामिल होने वाले सांसदों और विधायकों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विपक्षी पार्टियां अपने नेताओं को एकजुट रखने में पूरी तरह विफल साबित हो रही हैं। अठावले ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों से प्रभावित होकर ही विपक्ष के जनप्रतिनिधि लगातार पाला बदल रहे हैं।
विकास कार्यों से प्रभावित होकर एनडीए की ओर बढ़ रहे विपक्षी नेता
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने विपक्षी दलों में चल रही अंदरूनी कलह पर तंज कसते हुए कहा कि महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) किसी भी छोटी राजनीतिक पार्टी को खत्म नहीं कर रही है, बल्कि ये पार्टियां अपनी कमजोरी की वजह से खुद समाप्त हो रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल अपने सांसदों और विधायकों को संभाल पाने में नाकाम हैं। आज बहुत से सांसद और विधायक महसूस कर रहे हैं कि यदि देश और अपने क्षेत्र का वास्तविक विकास करना है, तो विपक्ष में बने रहने का कोई फायदा नहीं है। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का विकास एजेंडा बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसी भावना के कारण वे एनडीए से जुड़ना चाहते हैं।
तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसद मेरे सीधे संपर्क में: रामदास अठावले
ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चल रही उथल-पुथल का विशेष जिक्र करते हुए रामदास अठावले ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से ममता बनर्जी के 20 सांसद पहले ही एक अलग दल में शामिल हो चुके हैं, उसे देखते हुए यह स्पष्ट है कि तृणमूल कांग्रेस में भारी असंतोष है। अठावले ने बताया कि वे 24 जुलाई को कोलकाता के दौरे पर जा रहे हैं और टीएमसी के कुछ सांसद उनके सीधे संपर्क में हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि बचे हुए सांसदों में से 5 या 6 सांसद उनके पाले में आते हैं, तो वे उन्हें अपनी पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया-ए यानी आरपीआई (ए) में शामिल करने का पूरा प्रयास करेंगे।
असली टीएमसी के दावे को लेकर बागी गुट पहुंचा चुनाव आयोग
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के भीतर का सियासी संकट और गहरा गया है। टीएमसी के बागी सांसदों और विधायकों के गुट ने राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग (ईसीआई) के पूर्ण पीठ से मुलाकात की। बागी गुट के प्रमुख नेता ऋतब्रत बनर्जी ने आयोग के समक्ष दो-तिहाई से अधिक जनप्रतिनिधियों के समर्थन का आधिकारिक पत्र सौंपते हुए दावा किया कि विधायी और संसदीय नियमों के अनुसार उनका गुट ही “असली तृणमूल कांग्रेस” है।
दूसरी ओर, इस बगावत के बाद ममता बनर्जी गुट की वरिष्ठ नेता सागरिका घोष ने केंद्रीय सत्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग स्वायत्त रूप से काम नहीं कर रहा है, बल्कि वह पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिशा-निर्देशों पर काम कर रहा है।

