Alka Lamba on Kangana Ranaut: हिमाचल प्रदेश की मंडी संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के कारण एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ ‘टपोरी’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस पार्टी ने इसे भाषाई मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए कंगना पर तीखा हमला बोला है। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे भाजपा की हताशा करार दिया है।
स्मृति ईरानी से तुलना
अलका लांबा ने कंगना रनौत के व्यवहार की तुलना पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से की है। लांबा ने तंज कसते हुए कहा कि कंगना राजनीति में वही खाली जगह भरने की कोशिश कर रही हैं जो स्मृति ईरानी के जाने से बनी है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि स्मृति ईरानी भी कभी इसी तरह के घमंड में चूर रहती थीं, लेकिन आज वह राजनीतिक परिदृश्य से ओझल हो चुकी हैं। लांबा के अनुसार, “जैसे ‘सास भी कभी बहू थी’ वाली अभिनेत्री (स्मृति) राजनीति से गायब हो गईं, वैसा ही हश्र कंगना रनौत का भी होगा।”
बृजभूषण शरण सिंह और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर घेरा
कांग्रेस ने कंगना रनौत की ‘चयनात्मक नैतिकता’ पर सवाल उठाते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा किया है। अलका लांबा ने पूछा कि महिला अधिकारों की बात करने वाली सांसद तब चुप क्यों थीं जब बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे थे? उन्होंने हिमाचल प्रदेश में भाजपा विधायक पर लगे नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपों का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या कंगना अपने ही दल के दागी नेताओं के खिलाफ आवाज उठाएंगी? कुलदीप सिंह सेंगर से लेकर जेल से पैरोल पर बाहर आ रहे दोषियों के मामलों पर कंगना की खामोशी को कांग्रेस ने उनकी दोहरी नीति बताया है।
पीएम मोदी से अनोखी अपील
विवाद तब और गहरा गया जब अलका लांबा ने कंगना रनौत के अतीत और उनके स्वास्थ्य को लेकर व्यक्तिगत टिप्पणी की। लांबा ने राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान महिलाओं के उनके प्रति स्नेह का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल कंगना को ही राहुल गांधी असहज क्यों लगते हैं? उन्होंने कंगना के पुराने बयानों का हवाला देते हुए उनके नशे की लत का जिक्र किया और कहा कि शायद उस प्रभाव से वे अब भी बाहर नहीं आ पाई हैं। लांबा ने तंज कसते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वे एक ‘राष्ट्रीय नशा मुक्ति आयोग’ का गठन करें और अपनी सांसद कंगना रनौत को उसका अध्यक्ष बना दें।
हिमाचल की राजनीति में उबाल
कंगना रनौत के इस ताजा विवाद ने हिमाचल प्रदेश की स्थानीय राजनीति को भी प्रभावित किया है। मंडी की सांसद होने के नाते उनके हर बयान का सीधा असर उनके संसदीय क्षेत्र और प्रदेश भाजपा की छवि पर पड़ रहा है। जहाँ भाजपा इसे अभिव्यक्ति की आजादी और विपक्ष के प्रहार का जवाब बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे मंडी की जनता का अपमान और देवभूमि की संस्कृति के खिलाफ बता रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद थमने के बजाय और अधिक उग्र होने के आसार हैं।

