UP Voter List: उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई अंतिम मतदाता सूची ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के बाद सामने आए आंकड़े सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए चिंता का सबब बन सकते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन क्षेत्रों को भाजपा का अभेद्य गढ़ माना जाता था, वहीं सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम लिस्ट से बाहर हुए हैं।
बीजेपी के गढ़ों में वोटरों की भारी कटौती
एसआईआर (SIR) की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद यूपी के उन शहरों में सबसे ज्यादा ‘वोटर रिडक्शन’ (मतदाता कटौती) देखी गई है, जहां बीजेपी दशकों से जीतती आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुरुआती दौर में ही अंदेशा जताया था कि इस प्रक्रिया में बीजेपी समर्थकों के वोट बड़ी संख्या में कट सकते हैं, और आंकड़े इसी ओर इशारा कर रहे हैं। लखनऊ में सबसे ज्यादा लगभग 23 फीसदी वोट कम हुए हैं। इसके बाद प्रयागराज, कानपुर, आगरा और गाजियाबाद जैसे जिलों का नंबर आता है, जहाँ 18 से 20 प्रतिशत तक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
मुस्लिम बहुल इलाकों में कम असर
राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान था कि इस प्रक्रिया में मुस्लिम बहुल इलाकों में ज्यादा नाम कटेंगे, लेकिन नतीजे इसके बिल्कुल उलट रहे। मुस्लिम आबादी वाले जिलों जैसे बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर में नाम कटने की दर प्रदेश के औसत से काफी कम रही है। इन क्षेत्रों में मात्र 10 से 12 फीसदी के आसपास ही वोट कटे हैं। आंकड़ों का यह विरोधाभास बीजेपी की चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि एक तरफ उनके मजबूत बेस वाले इलाकों में वोट कम हुए हैं, वहीं विपक्षी प्रभाव वाले क्षेत्रों में सूची अपेक्षाकृत स्थिर है।
यूपी बना दूसरा सबसे ज्यादा वोट कटने वाला राज्य
उत्तर प्रदेश की नई वोटर लिस्ट से कुल दो करोड़ चार लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो यूपी अब गुजरात के बाद देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है जहाँ सबसे ज्यादा वोट कटे हैं। गुजरात में सर्वाधिक 13.4 प्रतिशत वोट कम हुए, जबकि यूपी में यह आंकड़ा 13.24% रहा है। यह भारी कटौती आने वाले चुनावों में हार-जीत के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है। नोएडा और मेरठ जैसे औद्योगिक और शहरी बेल्ट में भी 18-19 फीसदी वोटों का कम होना बीजेपी की पेशानी पर बल लाने के लिए काफी है।

