Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के नवनिर्मित सक्ती जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है, जहाँ मंगलवार की दोपहर एक औद्योगिक इकाई में भीषण बॉयलर विस्फोट हो गया। इस भयावह घटना ने न केवल औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि कई परिवारों के चिराग भी बुझा दिए हैं। आधिकारिक पुष्टि के अनुसार, अब तक इस हादसे में कुल 14 श्रमिकों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि दर्जनों अन्य अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
धमाके के साथ मचा हाहाका
मंगलवार दोपहर लगभग 2:00 बजे का समय था, जब सक्ती स्थित प्लांट का परिसर एक भीषण धमाके से दहल उठा। बॉयलर नंबर एक के समीप तकनीकी कर्मचारी और मजदूर अपनी नियमित शिफ्ट में व्यस्त थे, तभी अचानक हुए इस विस्फोट ने आसमान में धुएं का काला गुबार फैला दिया। चश्मदीदों के अनुसार, धमाका इतना तीव्र था कि मजदूरों को संभलने का एक क्षण भी नहीं मिला। कई श्रमिक मौके पर ही आग की लपटों और मलबे की चपेट में आ गए, जिससे उनकी स्थिति अत्यंत क्षत-विक्षत हो गई। बताया जा रहा है कि वहां मौजूद अधिकांश मजदूर पश्चिम बंगाल से आए थे जो पेंटिंग और अन्य तकनीकी कार्यों में संलग्न थे।
चिकित्सालयों में आपातकाल
विस्फोट के पश्चात घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एम्बुलेंस के जरिए घायलों को रायगढ़ के विभिन्न अस्पतालों में स्थानांतरित किया। मीडिया रिपोर्ट्स और मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, रायगढ़ के जिंदल फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराए गए 18 मजदूरों में से 8 ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान में उपचाराधीन कई मरीजों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि उनका शरीर 80 प्रतिशत से अधिक झुलस चुका है। चिकित्सा टीमें लगातार उन्हें बचाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन संक्रमण और गहरे जख्मों के कारण खतरा टला नहीं है।
परिजनों का आक्रोश और मुआवजे की घोषणा
हादसे की सूचना मिलते ही प्लांट के बाहर पीड़ित परिजनों की भारी भीड़ जमा हो गई। गुस्साए परिजनों ने प्रबंधन पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। इस बीच, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिवारों के लिए 2-2 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है।
तकनीकी जांच और कानूनी कार्रवाई
इंडस्ट्रियल सेफ्टी एक्सपर्ट्स का प्राथमिक अनुमान है कि बॉयलर में पानी का स्तर कम होने या सेफ्टी वाल्व के फेलियर के कारण अत्यधिक दबाव बना, जो अंततः विस्फोट का कारण बना। सक्ती कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। हालांकि, प्लांट प्रबंधन ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि इस यूनिट का संचालन और रखरखाव (O&M) एक अन्य आउटसोर्स कंपनी के पास था। अब जांच इस बात पर टिकी है कि क्या यह महज एक तकनीकी खराबी थी या फिर किसी स्तर पर गंभीर मानवीय लापरवाही बरती गई थी।

