Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी (AAP) से नाता तोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को डिजिटल मोर्चे पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। राजनीति के ‘पोस्टर बॉय’ कहे जाने वाले चड्ढा के इस फैसले से उनके प्रशंसक इस कदर नाराज हैं कि पिछले 48 घंटों में उनके सोशल मीडिया बेस में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहां एक तरफ वे नई राजनीतिक पारी शुरू कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से नीचे गिर रहा है।
इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की भारी गिरावट
राघव चड्ढा के लिए बीजेपी की सदस्यता लेना सोशल मीडिया पर महंगा साबित हो रहा है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 23 अप्रैल तक उनके इंस्टाग्राम पर 14.6 मिलियन (1.46 करोड़) फॉलोअर्स थे, लेकिन पाला बदलते ही यह संख्या घटकर 13.5 मिलियन रह गई है। मात्र दो दिनों के भीतर 11 लाख से ज्यादा लोगों ने उन्हें अनफॉलो कर दिया है। यह डिजिटल आक्रोश स्पष्ट करता है कि युवाओं के बीच उनकी छवि को इस राजनीतिक बदलाव से गहरा धक्का लगा है।
7 सांसदों ने छोड़ा साथ, तीन ने थामा ‘कमल’
राघव चड्ढा की बगावत अकेले नहीं थी; उनके साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रम साहनी, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता और हरभजन सिंह जैसे दिग्गजों ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, इनमें से मुख्य रूप से चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने ही बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है। इस्तीफे की पुष्टि करते हुए स्वाति मालीवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी व्यथा साझा की, जबकि राघव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘आप’ नेतृत्व पर गंभीर आरोप मढ़े।
पद से हटाए जाने की टीस
राघव चड्ढा की इस नाराजगी के पीछे मुख्य कारण राज्यसभा में डिप्टी लीडर (उपनेता) के पद से उन्हें हटाया जाना माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी ने चड्ढा को हटाकर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी थी, जिससे वे आहत थे। पार्टी की अंदरूनी गतिविधियों और बैठकों से उन्होंने लंबी दूरी बना ली थी। हालांकि वे संसद में जनता के मुद्दे उठाते रहे, लेकिन अपनी ही पार्टी के भीतर उनकी बढ़ती उपेक्षा ने इस राजनीतिक विद्रोह की नींव रख दी थी।
केजरीवाल के लिए नई चुनौतियां
अरविंद केजरीवाल के लिए यह स्थिति किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। राघव चड्ढा ने न केवल 6 सांसदों को साथ लिया है, बल्कि अब चर्चा है कि उनका अगला लक्ष्य दिल्ली के 22 विधायक और पंजाब के वरिष्ठ नेता हो सकते हैं। केजरीवाल के सामने अब दोहरा संकट है—पहला, राज्यसभा की 7 खाली सीटों को फिर से भरना और दूसरा, दिल्ली व पंजाब में अपने विधायकों को एकजुट रखना। राघव की रणनीति ‘आप’ के गढ़ में सेंध लगाने की है, जो आगामी चुनावों में केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ा सकती है।
सोशल मीडिया एनालिसिस:
- 23 अप्रैल: 14.6 मिलियन फॉलोअर्स
- 25 अप्रैल: 13.5 मिलियन फॉलोअर्स
- कुल नुकसान: 1.1 मिलियन (लगातार जारी)
राघव चड्ढा का यह कदम भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ है। जहाँ बीजेपी इसे अपनी जीत मान रही है, वहीं आम आदमी पार्टी इसे विश्वासघात करार दे रही है। अब देखना यह होगा कि क्या राघव चड्ढा अपनी खोई हुई डिजिटल लोकप्रियता को वापस पा सकेंगे या यह गिरावट उनकी नई पारी पर भारी पड़ेगी।

