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Pawan Khera को राहत ‘आप’ ने भाजपा पर बोला हमला, कहा—चुनाव प्रभावित करने के लिए एजेंसियों का हो रहा दुरुपयोग

Pawan Khera: कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद देश की सियासत गरमा गई है। इस अदालती फैसले के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा प्रहार किया है। ‘आप’ का आरोप है कि केंद्र सरकार संवैधानिक संस्थाओं और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों की आवाज दबाने और चुनावी समीकरणों को बिगाड़ने के लिए कर रही है।

बीजेपी पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और चुनावी टूल बनाने का आरोप

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने पवन खेड़ा को मिली राहत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा का एकमात्र उद्देश्य एजेंसियों और कानून का राजनीतिकरण (Politicization of Agencies) करके चुनाव को प्रभावित करना है। ढांडा ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल ने चुनाव आयोग की मिलीभगत (Collusion with Election Commission) से प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पुलिस जैसी संस्थाओं को अपना ‘टूल’ बना लिया है। उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा का मामला यह साबित करता है कि विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है।

चुनावी अभियान को बाधित करने और पश्चिम बंगाल का उदाहरण

अनुराग ढांडा ने भाजपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दो प्रमुख उदाहरण पेश किए। उन्होंने पवन खेड़ा के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में IPAC पर ईडी की छापेमारी (ED Raid on IPAC in Bengal) का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी के कैंपेन को ठप करने के लिए कर्मचारियों को परेशान किया गया और जबरदस्ती छुट्टी पर भेज दिया गया। ढांडा के अनुसार, यह चुनावी कैंपेन को प्रभावित करने की साजिश (Conspiracy to Sabotage Election Campaign) का हिस्सा था, ताकि सत्ता पक्ष को अनुचित लाभ मिल सके।

आचार संहिता के दौरान असम पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

‘आप’ प्रवक्ता ने असम पुलिस की कार्यशैली की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू थी, तब असम पुलिस ने दूसरे राज्यों में छापेमारी कैसे की? ढांडा ने कहा कि उस समय पुलिस चुनाव आयोग के अधीन कार्य कर रही थी, फिर भी विपक्ष को दबाने की कोशिश (Attempt to Suppress Opposition) की गई। उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव खत्म होते ही जैसे ही अदालतों ने मामलों की समीक्षा की, पवन खेड़ा और अन्य लोगों को जमानत मिल गई, जो इन मुकदमों के खोखलेपन को दर्शाता है।

सीएम की पत्नी के खिलाफ आरोपों और कानूनी विवाद का आधार

यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ था जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां के दस्तावेजों (Controversy over Riniki Bhuyan’s Documents) पर सवाल उठाए थे। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि सीएम की पत्नी के पास कई फर्जी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इन आरोपों के बाद गुवाहाटी अपराध शाखा में आपराधिक मामला और बीएनएस की धाराएं (Criminal Case under BNS Sections) दर्ज की गई थीं। ‘आप’ का मानना है कि ऐसे मुकदमों का आधार केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है।

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