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NCRB Report 2024: उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था का नया युग, ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के सुखद परिणाम

NCRB Report 2024: उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने वर्ष 2024 की राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) रिपोर्ट के हवाले से राज्य की कानून-व्यवस्था की एक सशक्त तस्वीर पेश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधों की तुलना का एकमात्र वैज्ञानिक आधार ‘क्राइम रेट’ है, जिसमें उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है।

अपराध दर (Crime Rate) में भारी गिरावट

डीजीपी राजीव कृष्ण के अनुसार, उत्तर प्रदेश का अपराध दर (Crime Rate) मात्र 180.2 है, जो कि 252.3 के राष्ट्रीय औसत के मुकाबले काफी कम है। यह सुधार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू की गई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का सीधा परिणाम है। राज्य में देश की 17% जनसंख्या निवास करती है, इसके बावजूद कुल अपराधों की सूची में यूपी 18वें स्थान पर है, जो राज्य की बदलती छवि को दर्शाता है।

पुलिस बल का आधुनिकीकरण और कानून-व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण

पिछले 9 वर्षों में यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। आधुनिक पुलिस स्टेशनों का निर्माण, एंटी-रोमियो स्क्वॉड की सक्रियता, हर थाने में समर्पित महिला हेल्प डेस्क और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की स्थापना ने न्याय व्यवस्था को गति दी है। डीजीपी ने जोर देकर कहा कि आज प्रदेश का कोई भी नागरिक बिना किसी डर के एफआईआर दर्ज करा सकता है। डिजिटल माध्यमों से प्राप्त शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेना अब पुलिस संस्कृति का हिस्सा बन चुका है।

गंभीर अपराध नियंत्रण एवं तुलनात्मक आपराधिक आंकड़ों का विश्लेषण

एनसीआरबी 2024 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश कई गंभीर अपराध श्रेणियों में देश के अन्य राज्यों से बहुत पीछे (बेहतर स्थिति में) है। फिरौती हेतु अपहरण और डकैती के मामलों में यूपी पूरे देश में सबसे नीचे (36वें स्थान) पर है। हत्या के मामलों में राज्य 29वें, हत्या के प्रयास में 26वें और दुष्कर्म के मामलों में 24वें स्थान पर है। ये सांख्यिकीय आंकड़े सिद्ध करते हैं कि राज्य में अपराधियों के भीतर कानून का भय व्याप्त है।

महिला न्याय और दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) में यूपी का शीर्ष स्थान

अपराधियों को सजा दिलाने के मामले में उत्तर प्रदेश ने पूरे देश के सामने एक मानक स्थापित किया है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में यूपी की दोषसिद्धि दर 76.6% है, जो देश में सर्वाधिक है। तुलनात्मक रूप से देखें तो पश्चिम बंगाल (1.6%), कर्नाटक (4.8%) और तेलंगाना (14.8%) जैसे राज्यों की स्थिति काफी चिंताजनक है। यूपी में सजा दिलाने की यह ऊंची दर सुनिश्चित करती है कि अपराधी कानून के चंगुल से बच न सकें।

महानगरीय पुलिसिंग और जेल प्रशासन में पारदर्शिता

उत्तर प्रदेश के महानगरों में जांच की गति देश के अन्य बड़े शहरों से कहीं अधिक तेज है। कानपुर और लखनऊ में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में चार्जशीट दाखिल करने की दर क्रमशः 84.4% और 83.7% है। इसके अतिरिक्त, जेलों के बेहतर प्रबंधन में भी यूपी आगे है। यूपी की केंद्रीय जेलों में ‘ऑक्यूपेंसी रेट’ 74.3% है, जो पंजाब और केरल जैसे राज्यों की तुलना में बहुत अधिक सुव्यवस्थित और अनुशासित है

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