लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम तेज कर दी है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के कड़े रुख के बाद, शासन ने सहकर्मी से दुर्व्यवहार, अवैध वसूली और निजी प्रैक्टिस के मामलों में संलिप्त कई वरिष्ठ डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत राज्य स्वास्थ्य एजेंसी में तैनात एक डॉक्टर को तत्काल प्रभाव से उनके मूल तैनाती स्थल पर वापस भेज दिया गया है, वहीं कई अन्य की वार्षिक वेतनवृद्धियां रोक दी गई हैं।
सहकर्मी से बदसलूकी पर गिरी गाज
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) में तैनात डॉ. आदित्य पांडे के खिलाफ अनुशासनहीनता का गंभीर मामला सामने आया है। उन पर अपने ही सहकर्मी के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा था, जिसकी प्रारंभिक जांच के बाद सरकार ने कड़ा फैसला लिया है। शासन ने उनकी प्रतिनियुक्ति (Deputation) को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है और उन्हें उनके मूल तैनाती स्थल, रायबरेली भेज दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कार्यस्थल पर गरिमा और पेशेवर व्यवहार से समझौता करने वाले अधिकारियों के लिए विभाग में कोई स्थान नहीं है।
मरीजों से अवैध वसूली और दुर्व्यवहार
अवैध वसूली और मरीजों के साथ अभद्रता करने के मामले में हमीरपुर में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लालमणि के खिलाफ सबसे सख्त वित्तीय दंड लगाया गया है। आजमगढ़ में तैनाती के दौरान डॉ. लालमणि पर मरीजों से पैसे लेने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप सिद्ध पाए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप, सरकार ने उनकी तीन वार्षिक वेतनवृद्धियां (Increments) स्थाई रूप से रोकने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई उन डॉक्टरों के लिए चेतावनी है जो सरकारी सेवा में रहते हुए जनता का शोषण करते हैं।
वेतनवृद्धि पर रोक का सिलसिला
अनुशासनात्मक कार्रवाई की आंच प्रदेश के अन्य जिलों तक भी पहुँच गई है। बलरामपुर में तैनात डॉ. संतोष सिंह के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं के चलते उनकी 4 वेतनवृद्धियां रोकी गई हैं, जो विभागीय स्तर पर एक बड़ा दंड माना जाता है। इसी क्रम में झांसी की डॉ. निशा बुंदेला की भी 2 वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की इस सक्रियता ने उन अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है जो अब तक अपनी जिम्मेदारियों के प्रति शिथिलता बरत रहे थे।
निजी प्रैक्टिस के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
सरकारी सेवा के नियमों का उल्लंघन कर निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों पर भी सरकार की पैनी नजर है। झांसी के मोठ ट्रॉमा सेंटर में तैनात ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. पवन साहू के खिलाफ शिकायत मिली थी कि वे सरकारी ड्यूटी के समय निजी प्रैक्टिस में संलिप्त रहते हैं। जांच में ये आरोप सही पाए जाने के बाद शासन ने उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग अब ऐसे सभी डॉक्टरों की सूची तैयार कर रहा है जो सरकारी संसाधनों का उपयोग कर निजी लाभ उठा रहे हैं।

