UP Politics: लोकसभा में परिसीमन बिल के गिरने के बाद भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक मतभेद अब व्यक्तिगत छींटाकशी तक पहुंच गए हैं। भाजपा के आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से एक विवादित पोस्ट साझा की गई, जिसमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ उन्हें ‘वांटेड’ करार दिया गया। इस पोस्ट ने प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। भाजपा ने व्यंग्यात्मक लहजे में अखिलेश पर हमला बोलते हुए लिखा कि उन्हें आखिरी बार ‘टोंटी’ चुराते हुए देखा गया था। यह पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जिससे दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ गया है।
नारी शक्ति के अधिकारों का मुद्दा
भाजपा, उत्तर प्रदेश के सोशल मीडिया अकाउंट से जारी संदेश में अखिलेश यादव पर नीतिगत प्रहार भी किए गए। पार्टी ने उन पर महिला अधिकारों के मार्ग में बाधा बनने का आरोप लगाया। भाजपा का दावा है कि सपा अध्यक्ष ने संसद में ‘नारी शक्ति’ के हक और उनके सशक्तीकरण के लिए लाए गए प्रावधानों का विरोध किया है। सत्ता पक्ष के अनुसार, परिसीमन बिल का विरोध करना सीधे तौर पर महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को रोकने की कोशिश है। इसी आधार पर भाजपा ने उन्हें महिला विरोधी बताते हुए जनता के बीच उनकी छवि को नकारात्मक रूप में पेश करने का प्रयास किया है।
पीडीए समाज की एकजुटता का डर
भाजपा के इस तीखे हमले पर पलटवार करने में अखिलेश यादव ने भी देर नहीं की। उन्होंने भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह सब उनकी हार की हताशा का परिणाम है। अखिलेश के अनुसार, भाजपा इस बात से डरी हुई है कि देश की 95 प्रतिशत आबादी वाला ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज अब एकजुट होकर उनकी जनविरोधी नीतियों के खिलाफ खड़ा हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पराजय के डर से भाजपा मानसिक संतुलन खो रही है और इसी कारण वे व्यक्तिगत टिप्पणियों पर उतर आए हैं।
इतिहास और गद्दारी का आरोप
अखिलेश यादव ने अपने जवाब में भाजपा और उनके वैचारिक संगठनों के इतिहास पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए। उन्होंने भाजपा नेताओं को ‘गद्दार’ संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि इन लोगों ने आजादी की लड़ाई के दौरान भी देश के साथ दगाबाजी की थी। सपा प्रमुख ने कहा कि जो लोग आज सत्ता में हैं, उनके पूर्वजों ने भूमिगत रहकर गुलामी करने वालों का साथ दिया था। उन्होंने भाजपा पर ‘अकूत दौलत’ इकट्ठा करने और भ्रष्टाचार का हिसाब न देने का आरोप भी लगाया। अखिलेश का तर्क है कि भाजपा न तो पहले जवाबदेह थी और न ही आज जनता को अपने कामों का हिसाब दे रही है, बल्कि केवल नफरत और नकारात्मकता फैला रही है।

