Imran Masood On PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 18 अप्रैल 2026 को राष्ट्र के नाम दिए गए संबोधन के बाद देश की राजनीति में उबाल आ गया है। जहाँ पीएम मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्ष और विशेषकर समाजवादी पार्टी को ‘महिला विरोधी’ करार दिया, वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मसूद ने पीएम के दावों को खारिज करते हुए उनके भाषण को ‘शून्य’ अंक दिए हैं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम और राजनीतिक अधिकार
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रधानमंत्री के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि महिला आरक्षण का विचार वर्तमान सरकार की उपज नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill) वास्तव में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का दूरदर्शी सपना था। मसूद ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार केवल परिसीमन की आड़ में राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहती है और इस अधिनियम के माध्यम से विपक्षी नेताओं की सीटें ‘हड़पने’ की साजिश रच रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर है, तो उसे मौजूदा 543 सीटों में ही तत्काल आरक्षण लागू करना चाहिए।
चुनाव के दौरान संसद सत्र और लोकतांत्रिक प्रक्रिया
सांसद इमरान मसूद ने चुनाव के बीच अचानक सत्र बुलाए जाने की मंशा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने संसदीय कार्यप्रणाली (Legislative Process) और लोकतांत्रिक परंपराओं का हवाला देते हुए पूछा कि आखिर ऐसी क्या ‘जल्दबाजी’ थी कि चुनाव के शोर के बीच विशेष संबोधन और सत्र की आवश्यकता पड़ी? मसूद ने कहा कि जब यह विधेयक दो-तिहाई बहुमत से ही पारित होना है, तो सरकार को सभी दलों के साथ बैठक कर आम सहमति बनानी चाहिए थी। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस संबोधन को राजनीतिक स्टंट करार देते हुए इसे 10 में से जीरो नंबर दिए।
समाजवादी पार्टी पर ‘महिला विरोधी’ दाग और परिवारवाद का आरोप
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी (सपा) पर सीधा हमला बोलते हुए उसे ‘महिला विरोधी’ पार्टी बताया था। पीएम ने कहा था कि सपा जैसी परिवारवादी पार्टियां (Dynastic Politics) कभी नहीं चाहतीं कि जमीनी स्तर पर नेतृत्व कर रही महिलाएं संसद तक पहुंचें। पीएम मोदी के अनुसार, विपक्ष के पास अपने दाग धोने का मौका था, लेकिन उन्होंने इसे गंवा दिया। इमरान मसूद ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि पीएम मोदी विपक्षी दलों का नाम लेकर जनता को गुमराह कर रहे हैं और सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं।
विपक्षी एकता और महिलाओं के नेतृत्व का भविष्य
संबोधन के बाद शुरू हुई इस जुबानी जंग ने यह साफ कर दिया है कि महिला सशक्तिकरण और राजनीति (Women Empowerment in Politics) आने वाले समय में एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहने वाला है। एक तरफ जहाँ मोदी सरकार इसे अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, वहीं कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके जैसे दल इसे ‘छल’ करार दे रहे हैं। इमरान मसूद ने अंत में कहा कि देश की जनता और महिलाएं भाजपा के इन ‘मंसूबों’ को समझ चुकी हैं और इसका जवाब आने वाले समय में स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

