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Petrol-Diesel Price Hike: महंगाई की मार! कच्चे तेल में उबाल से पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर, विपक्ष भड़का

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भीषण तेजी ने भारतीय रसोई और परिवहन बजट को हिलाकर रख दिया है। शुक्रवार सुबह से ही सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की नई दरें लागू कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी तनाव और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात निर्भर देश पर पड़ा है। इस मूल्य वृद्धि को पिछले कुछ समय की सबसे बड़ी बढ़ोत्तरी माना जा रहा है।

राजधानी में तेल और गैस के नए रेट

देश की राजधानी दिल्ली में उपभोक्ताओं को अब ईंधन के लिए अपनी जेब और ढीली करनी होगी। पेट्रोल की कीमतों में 3.14 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि के बाद अब यह 97.77 रुपये के स्तर पर पहुँच गया है। इसी तरह, डीजल के दामों में भी 3.11 रुपये की बढ़त दर्ज की गई है, जिससे नई दर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है। केवल वाहन ईंधन ही नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के रूप में उपयोग होने वाली सीएनजी (CNG) की दरों में भी 2 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है, जिससे दिल्ली में अब सीएनजी 79.09 रुपये प्रति किलो मिलेगी।

तेल कंपनियों का घाटा और सरकारी तर्क

इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी दिग्गज तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल की तुलना में घरेलू कीमतें न बढ़ने से उन्हें भारी वित्तीय चपत लग रही थी। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, कंपनियां प्रतिदिन 1000 करोड़ रुपये का घाटा सह रही थीं। यदि यह कदम नहीं उठाया जाता, तो एक तिमाही में घाटा 1 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता था। गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर को छू गई है।

रुपये की गिरावट और आर्थिक चुनौतियां

ईंधन संकट के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था एक और मोर्चे पर संघर्ष कर रही है—रुपये की कमजोरी। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 95 रुपये के ऐतिहासिक निचले स्तर को पार कर गया है। इस आर्थिक दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ ईंधन का विवेकपूर्ण उपयोग करने, सोने का आयात घटाने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने का आग्रह किया है। बढ़ती महंगाई के बीच रुपये की यह गिरावट आयात को और महंगा बना रही है।

महंगाई पर सियासी घमासान

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग लगते ही देश में राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री को ‘महंगाई मैन’ की संज्ञा दी है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए इसे “मोदी की वसूली” करार दिया। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बढ़ते दामों पर चुटकी लेते हुए जनता को याद दिलाया कि भविष्य में सुलभ और सस्ती यात्रा के लिए ‘साइकिल’ ही सबसे बेहतर विकल्प है। विपक्ष के इन हमलों ने आगामी चुनावों से पहले महंगाई के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है।

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