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दिल्ली पुलिस ने पेश की मिसाल, मासूम से छेड़छाड़ के आरोपी को 32 दिनों में दिलाई सजा

दिल्ली : दिल्ली के बाहरी जिले के निहाल विहार थाना पुलिस ने न्याय व्यवस्था में एक ऐसा उदाहरण पेश किया है जिसे आमतौर पर दुर्लभ माना जाता है। एक 11 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई छेड़छाड़ के संवेदनशील मामले में पुलिस ने अपनी पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए आरोपी को महज 32 दिनों के भीतर सजा के अंजाम तक पहुँचाया। यह मामला न केवल पुलिस की सतर्कता को दर्शाता है, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास को भी सुदृढ़ करता है।
​तत्परता से जांच और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया
​मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बिना समय गंवाए अपनी कानूनी प्रक्रिया (Legal Proceedings) शुरू की। पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों पर जोर देते हुए आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया और रिकॉर्ड 18 दिनों के भीतर अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी। पुलिस की इस तत्परता का परिणाम यह रहा कि माननीय न्यायालय ने भी मामले की संवेदनशीलता को समझा और मात्र 14 दिनों में ट्रायल पूरा कर लिया। अदालत ने दोषी को 5 साल की कठोर कैद और ₹10,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
​वूमेन सब-इंस्पेक्टर पूजा का साहस और मानवीय दृष्टिकोण
​सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में वूमेन सब-इंस्पेक्टर (W/SI) पूजा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। बताया जा रहा है कि शुरुआत में पीड़ित परिवार सामाजिक दबाव या डर के कारण शिकायत दर्ज कराने से कतरा रहा था। ऐसे में सब-इंस्पेक्टर पूजा ने संवेदनशीलता दिखाते हुए परिवार से संवाद किया, उन्हें ढांढस बंधाया और न्याय दिलाने का पूरा भरोसा दिया। उनकी इसी काउंसलिंग के बाद मामला दर्ज हुआ और अपराधी को सलाखों के पीछे भेजने की राह प्रशस्त हुई।
​टीम वर्क और सीसीटीवी फुटेज का गहन विश्लेषण
​इस सफल ऑपरेशन को आउटर जिला डीसीपी विक्रम सिंह के दिशा-निर्देशन और एसीपी राजबीर लांबा की निगरानी में अंजाम दिया गया। थानाध्यक्ष (SHO) इंस्पेक्टर शिशपाल के नेतृत्व में बनी विशेष टीम ने दिन-रात एक कर दिया। इस टीम में W/SI पूजा, हेड कांस्टेबल धर्मपाल, देवेंद्र ढाका, विक्रांत और कांस्टेबल विपिन शामिल थे। टीम ने अपराधी का सुराग लगाने के लिए इलाके के 100 से ज्यादा सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले। कड़ियों को जोड़ने और पुख्ता सबूत जुटाने की इसी मेहनत ने आरोपी को बच निकलने का कोई मौका नहीं दिया।
​दिल्ली पुलिस का संकल्प और न्याय के प्रति समर्पण
​निहाल विहार थाना पुलिस की इस कामयाबी ने यह साबित कर दिया है कि यदि नीयत साफ हो और टीम के भीतर कार्य के प्रति अटूट समर्पण (Dedication) हो, तो ‘न्याय में देरी’ की धारणा को बदला जा सकता है। “दिल्ली पुलिस, दिल की पुलिस” के नारे को चरितार्थ करते हुए इस टीम ने स्पष्ट संदेश दिया है कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। आज इस त्वरित न्याय की चर्चा पूरे जिले में है और यह टीम अन्य पुलिसकर्मियों के लिए एक प्रेरणा बन गई है।

-नीरज कुमार

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