You are currently viewing West Bengal News: बंगाल में ध्वनि प्रदूषण पर ‘स्ट्राइक’!  शुभेंदु सरकार ने लाउडस्पीकर के लिए जारी की सख्त गाइडलाइंस

West Bengal News: बंगाल में ध्वनि प्रदूषण पर ‘स्ट्राइक’! शुभेंदु सरकार ने लाउडस्पीकर के लिए जारी की सख्त गाइडलाइंस

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की नई सरकार ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सार्वजनिक शांति और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए ध्वनि प्रदूषण के विरुद्ध निर्णायक युद्ध छेड़ दिया है। प्रशासन ने लाउडस्पीकर के अनियंत्रित उपयोग को रोकने के लिए नई नियमावली लागू कर दी है, जिसका उल्लंघन करने वालों पर अब कानूनी शिकंजा कसेगा।

प्रशासनिक सुधार और शोर-शराबे पर सरकारी अंकुश

सत्ता परिवर्तन के साथ ही बंगाल की सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर अब मनमर्जी से लाउडस्पीकर बजाना बीते दौर की बात हो गई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि माननीय उच्च न्यायालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (WBPCB) द्वारा निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। सरकार का यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो नियमों को ताक पर रखकर सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों का शोर मचाते थे। अब मानकों की अनदेखी करने पर प्रशासन किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगा।

पुलिस को सख्त निर्देश और ध्वनि सीमा की निगरानी

मुख्यमंत्री ने गृह विभाग और पुलिस प्रशासन को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि राज्य के प्रत्येक कोने में ध्वनि प्रदूषण कानूनों को तत्काल और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। पुलिस बल को अब रिहायशी इलाकों और संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे गश्त और निगरानी करने का निर्देश मिला है। यदि कहीं भी ध्वनि की तीव्रता निर्धारित ‘डेसिबल’ सीमा से अधिक पाई जाती है, तो पुलिस को न केवल उपकरण जब्त करने के अधिकार दिए गए हैं, बल्कि आयोजकों पर भारी जुर्माना और कानूनी मुकदमा दर्ज करने की भी छूट दी गई है।

धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक आयोजनों हेतु समान नियम

सरकार ने इस अभियान में ‘समानता’ के सिद्धांत को सर्वोपरि रखा है। पुलिस प्रशासन को साफ संदेश दिया गया है कि कानून का पालन बिना किसी भेदभाव के सुनिश्चित किया जाए। चाहे वह मंदिर हो, मस्जिद हो, गुरुद्वारा हो या कोई राजनीतिक एवं सामाजिक उत्सव—ध्वनि प्रदूषण के नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे। सरकार का तर्क है कि छात्रों की शिक्षा, बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य और आम जनता के चैन के लिए एक शांत वातावरण का निर्माण करना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

ध्वनि मापक यंत्रों से जांच और जनसहयोग की अपील

कानून व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए पुलिस अब आधुनिक ‘साउंड लेवल मीटर’ का उपयोग करेगी। मोहल्लों और मुख्य चौराहों पर औचक निरीक्षण किया जाएगा ताकि शोर के स्तर की सटीक माप की जा सके। इसके साथ ही, शुभेंदु सरकार ने जनता से अपील की है कि वे इस सुधार प्रक्रिया में प्रशासन का सहयोग करें। सरकार का यह सख्त रुख इस बात का संकेत है कि अब बंगाल में प्रशासनिक इकबाल और न्यायिक आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Spread the love

Leave a Reply