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Food Preservation: मिट्टी के घड़े से लेकर नमक तक, ऐसे सुरक्षित रहता था खाना

Food Preservation: आज के दौर में फ्रिज हर घर की जरूरत बन चुका है। दूध से लेकर सब्जियां और बचा हुआ खाना तक सुरक्षित रखने के लिए लोग पूरी तरह फ्रिज पर निर्भर हो गए हैं। ऐसे में अगर कुछ घंटों के लिए भी बिजली चली जाए या फ्रिज खराब हो जाए, तो खाने के खराब होने की चिंता सताने लगती है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब न तो हर घर में बिजली होती थी और न ही फ्रिज जैसी सुविधाएं मौजूद थीं। इसके बावजूद हमारे बुजुर्ग गर्मियों में भी खाने-पीने की चीजों को लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित रखने में सफल रहते थे।

मिट्टी के घड़े और मटके का इस्तेमाल

पहले के समय में मिट्टी के बर्तन सिर्फ पानी ठंडा रखने के लिए नहीं, बल्कि खाने को सुरक्षित रखने के लिए भी उपयोग किए जाते थे। मिट्टी में प्राकृतिक ठंडक होती है, जिससे बर्तन के अंदर का तापमान सामान्य से कम बना रहता है। जब घड़े की सतह पर मौजूद पानी धीरे-धीरे सूखता है, तो अंदर ठंडक पैदा होती है।

इसी वजह से लोग दूध, दही, छाछ और पके हुए चावल जैसी चीजों को मिट्टी के बर्तनों में रखते थे। कई बार इन बर्तनों को गीले कपड़े से ढक दिया जाता था ताकि ठंडक ज्यादा देर तक बनी रहे और खाना जल्दी खराब न हो।

जीर पॉट तकनीक थी प्राकृतिक फ्रिज

पुराने समय में कुछ इलाकों में “जीर पॉट” नाम की खास तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था। इसे प्राकृतिक फ्रिज भी कहा जाता है। इस तरीके में एक बड़े मिट्टी के बर्तन के अंदर छोटा बर्तन रखा जाता था और दोनों के बीच की जगह में गीली रेत भर दी जाती थी। ऊपर से गीला कपड़ा ढक दिया जाता था।

जब रेत और कपड़े का पानी धीरे-धीरे सूखता था, तब अंदर ठंडा वातावरण बन जाता था। इससे फल, सब्जियां और दूध जैसी चीजें लंबे समय तक ताजा बनी रहती थीं। गर्म और सूखे इलाकों में यह तरीका काफी कारगर माना जाता था।

बहते पानी की ठंडक से बचता था खाना

पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोग प्राकृतिक झरनों और बहते पानी का उपयोग खाने को सुरक्षित रखने के लिए करते थे। खाने के बर्तनों को बहते पानी के पास या उसके ऊपर लटका दिया जाता था ताकि पानी की ठंडक खाने तक पहुंचती रहे।

इससे खाने का तापमान कम बना रहता था और वह जल्दी खराब नहीं होता था। साथ ही लगातार हवा और ठंडक मिलने के कारण बैक्टीरिया भी कम पनपते थे। आज भी कई दूरदराज के गांवों में यह पारंपरिक तरीका देखने को मिलता है।

नमक और धूप से लंबे समय तक सुरक्षित रहता था भोजन

फ्रिज के आने से पहले नमक और धूप सबसे बड़े प्राकृतिक संरक्षक माने जाते थे। लोग मछली, मांस और सब्जियों में नमक लगाकर उन्हें धूप में सुखा देते थे। धूप खाने की नमी को खत्म कर देती थी, जबकि नमक बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता था।

यही वजह है कि अचार, पापड़, बड़ी और सूखी मछली जैसी चीजें महीनों तक खराब नहीं होती थीं। कच्चे आम के टुकड़ों को नमक लगाकर सुखाने की परंपरा आज भी कई घरों में निभाई जाती है।

प्राकृतिक तरीके आज भी हैं उपयोगी

पुराने समय के ये देसी उपाय न सिर्फ सस्ते और आसान थे, बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित माने जाते हैं। आज जब लोग बिजली की बढ़ती खपत और प्रदूषण को लेकर चिंतित हैं, तब ये पारंपरिक तरीके फिर से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। ये उपाय हमें सिखाते हैं कि बिना आधुनिक मशीनों के भी समझदारी और प्रकृति की मदद से भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

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