US Iran War : ईरान के खिलाफ सैन्य मोर्चे पर मिली नाकामी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई कूटनीतिक फजीहत के बाद अब अमेरिकी सरकार के भीतर बड़े प्रशासनिक फेरबदल और कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए व्हाइट हाउस के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (डिप्टी एनएसए) के पद से रॉबर्ट गेबियल जूनियर को अचानक हटा दिया है। उनके स्थान पर विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बेहद करीबी और भरोसेमंद अधिकारी माइक निडहम की नई नियुक्ति की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रॉबर्ट गेबियल ने बीते 21 मई को ही व्हाइट हाउस के उप सुरक्षा सलाहकार पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया था। उल्लेखनीय है कि इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड का भी जबरन इस्तीफा लिया था, जिन्होंने ईरान जंग के दौरान ट्रंप प्रशासन की रणनीतियों की सार्वजनिक रूप से तीखी आलोचना की थी।
लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व संकट के बीच माइक निडहम को मिली कमान
अमेरिकी समाचार आउटलेट ‘एक्सियोस’ की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, माइक निडहम की यह महत्वपूर्ण नियुक्ति ऐसे संवेदनशील समय में हुई है, जब सुपरपावर अमेरिका वेनेजुएला, क्यूबा और ईरान के साथ जारी त्रिकोणीय राजनीतिक व सैन्य लड़ाई में बुरी तरह फंसा हुआ है।
निडहम अब राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बेहद पेचीदा मामलों में सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी रणनीतिक सलाह देंगे। संगठनात्मक ढांचे के अनुसार, निडहम के बॉस देश के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ही रहेंगे, जिनके पास वर्तमान में विदेश मंत्रालय के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का अतिरिक्त कार्यभार भी मौजूद है।
ट्रंप के सबसे भरोसेमंद अफसर रॉबर्ट गैबियल जूनियर के हटने की असली वजह
रॉबर्ट गैबियल जूनियर को एक समय में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सबसे खास और आंख-कान माना जाने वाला अफसर समझा जाता था। लेकिन हाल के दिनों में मध्य पूर्व के सुरक्षा मसले और सैन्य मोर्चे पर जिस तरीके से अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भद पिटी है, उसने उनके रणनीतिक कौशल पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए थे।
अमेरिकी सीनेट और सेना के भीतर भी उनकी कार्यशैली को लेकर लगातार उंगलियां उठ रही थीं, जिसके भारी दबाव में आकर आखिरकार गैबियल को अपने पद से हटना पड़ा। उनकी जगह आए माइक निडहम पहले से ही रुबियो के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। आपको बता दें कि पिछले साल जब व्हाइट हाउस ने माइक वाल्ट्ज को सुरक्षा सलाहकार के पद से बर्खास्त किया था, तभी मार्को रुबियो को इस पद का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया था।
ईरान सैन्य मोर्चे से जुड़े अमेरिका के चार शीर्ष अधिकारियों की हुई छुट्टी
अमेरिकी रक्षा और सुरक्षा तंत्र के लिए पिछला एक महीना बेहद उथल-पुथल भरा रहा है। 26 अप्रैल से लेकर 26 मई 2026 तक, यानी महज एक महीने के भीतर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों से जुड़े चार सबसे टॉप अधिकारियों को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है। इस सूची में रॉबर्ट गेबियल और तुलसी गबार्ड के अलावा अमेरिकी नौसेना (US Navy) के सचिव जॉन फेलन और अमेरिकी सेना (US Army) के मुख्य स्टाफ जनरल रेंडी जॉर्ज का नाम भी शामिल है, जिन्हें अचानक पद से हटा दिया गया है। पद छोड़ने या हटाए जाने वाले ये सभी शीर्ष सैन्य और प्रशासनिक अधिकारी किसी न किसी रूप में ईरान युद्ध की रणनीति और उसके क्रियान्वयन से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे।
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने तोड़ी अमेरिका की कमर, समझौते को मजबूर
इस पूरे वैश्विक संकट की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध का बिगुल फूंका था। उस वक्त अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ईरान में तख्तापलट और वहां की सरकार को घुटनों पर लाने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन अमेरिकी सेना अपने इस खुफिया मिशन में पूरी तरह नाकाम साबित हुई। इसके उलट, जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया।
अमेरिका ने अपनी नौसैनिक ताकत के दम पर इस जलडमरूमध्य की नाकेबंदी को खुलवाने का हर संभव सैन्य प्रयास किया, लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिल पाई। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे विपरीत असर को देखते हुए आखिरकार अमेरिका को पीछे हटना पड़ा और उसने कूटनीतिक समझौते का रास्ता चुना। वर्तमान में दोनों देशों के बीच युद्ध विराम और समझौते को लेकर पर्दे के पीछे बातचीत का दौर जारी है।

