Delhi Building Collapse: देश की राजधानी दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-16 इलाके से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। मंगलवार शाम करीब 4:00 बजे यहाँ एक निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर जमींदोज हो गई। इस भीषण हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मलबे के नीचे कई मजदूरों और राहगीरों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच चुके हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन का ताजा अपडेट
दिल्ली फायर सर्विस (DFS) और स्थानीय निवासियों के संयुक्त प्रयासों से अब तक चार लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है। दमकल विभाग की टीम ने तीन लोगों को बाहर निकाला, जिनमें से दो की मौके पर ही मौत हो चुकी थी, जबकि एक व्यक्ति घायल अवस्था में मिला। वहीं, दमकल कर्मियों के पहुंचने से पहले स्थानीय लोगों ने जिस एक व्यक्ति को मलबे से निकाला था, उसे भी डॉक्टरों ने अस्पताल में मृत घोषित कर दिया। इस तरह इस इमारत हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 3 हो गई है।
युद्धस्तर पर बचाव अभियान
हादसे वाली जगह पर लगातार हो रही तेज बारिश के बावजूद रेस्क्यू ऑपरेशन को युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। घटना स्थल पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के करीब 50 जवान, दिल्ली फायर सर्विस के 20 कर्मचारी और स्थानीय पुलिस के 25 से अधिक जवान मुस्तैदी से डटे हुए हैं। भारी कंक्रीट और मलबे को तेजी से हटाने के लिए 8 जेसीबी (JCB) मशीनों को काम पर लगाया गया है। घायलों को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा देने के लिए कई एम्बुलेंस भी मौके पर खड़ी की गई हैं।
हाई-टेक उपकरणों से जिंदगियों की तलाश
समय रहते मलबे के नीचे दबे जीवित लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू टीमें ‘गोल्डन ऑवर’ का सही इस्तेमाल कर रही हैं। इसके लिए अत्याधुनिक लाइव डिटेक्टर्स (LIVE Detectors) उपकरणों की मदद ली जा रही है, जो मलबे की परतों के नीचे दबे इंसान की धड़कन या मामूली हलचल को भी पकड़ लेते हैं। स्कैनिंग के दौरान कुछ समय के लिए पूरे इलाके की हलचल और मशीनों को रोक दिया जाता है ताकि मलबे के अंदर से आने वाली बेहद धीमी आवाज को भी सुना जा सके। हालांकि, बारिश इस खोजी अभियान में बड़ी बाधा बन रही है।
चश्मदीदों की जुबानी, खौफनाक मंजर
स्थानीय निवासी गणेश के अनुसार, यह हादसा शाम करीब 4:10 बजे हुआ और इमारत गिरते ही सड़क से गुजर रहे कुछ राहगीर भी इसकी चपेट में आ गए। एक अन्य निवासी ने बताया कि चूंकि यह इलाका मजदूर वर्ग का है, इसलिए मलबे में कामगारों के पूरे परिवार के फंसे होने की आशंका है। लोगों ने राहत की सांस लेते हुए यह भी कहा कि यदि आज यहाँ साप्ताहिक ‘फ्राइडे मार्केट’ लगा होता, तो भीड़भाड़ के कारण यह हादसा और भी भीषण रूप ले सकता था।
गृह प्रवेश की चल रही थी तैयारी
पड़ोसियों के मुताबिक, इस इमारत का निर्माण कार्य पिछले दो वर्षों से चल रहा था। चार मंजिलों का ढांचा पूरी तरह तैयार हो चुका था और इन दिनों केवल फिनिशिंग का काम बाकी था। स्थानीय लोगों का दावा है कि अगले ही महीने इस नवनिर्मित मकान में गृह प्रवेश (मुहूर्त) होने वाला था, जिसके लिए मकान मालिक अक्सर वहां बैठते थे। चश्मदीद अंकुर दुबे के अनुसार, ग्राउंड फ्लोर पर कुछ मजदूर अस्थाई रूप से रह रहे थे, जिनके मलबे में दबे होने की प्रबल आशंका है। अनुमान है कि 8 से 10 लोग अब भी लापता हैं।
संरचनात्मक विफलता पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे हादसे ने दिल्ली में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। जब इमारत लगभग पूरी बन चुकी थी, तो वह अचानक कैसे ढह गई? क्या इसके निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था या इसके स्ट्रक्चरल डिजाइन में कोई बड़ी खामी थी? क्या संबंधित ठेकेदार या मालिक ने नगर निगम के नियमों का उल्लंघन किया था? इन सभी पहलुओं पर आधिकारिक जांच के बाद ही पर्दा उठेगा, लेकिन फिलहाल पहली प्राथमिकता जिंदगी बचाना है।

