Raja Bhaiya: उत्तर प्रदेश के कुंडा निर्वाचन क्षेत्र से बाहुबली विधायक और जनसत्ता दल के प्रमुख रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की कानूनी मुश्किलें देश की राजधानी में काफी बढ़ गई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने उनकी पत्नी भानवी सिंह द्वारा दायर किए गए घरेलू हिंसा के मामले में निचली अदालत से जारी समन को पूरी तरह से बरकरार रखा है। न्यायालय ने राजा भैया द्वारा इस समन के खिलाफ दायर की गई पुनरीक्षण याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। इस अदालती फैसले के बाद अब राजा भैया को अपनी पत्नी द्वारा लगाए गए गंभीर प्रताड़ना के आरोपों के तहत न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना ही होगा।
वैवाहिक विवाद में दोनों पक्षों के बीच आर-पार की जंग
लंबे समय से चल रहे इस हाई-प्रोफाइल पारिवारिक विवाद में राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के बीच के रिश्ते बेहद तल्ख हो चुके हैं। एक तरफ जहां कुंडा के विधायक राजा भैया ने अपनी पत्नी पर मानसिक क्रूरता, दुर्व्यवहार और उन्हें अकेला छोड़ने (परित्याग) का संगीन आरोप लगाते हुए साकेत कोर्ट में तलाक (Divorce) की अर्जी दाखिल कर रखी है। वहीं दूसरी तरफ, भानवी सिंह ने पलटवार करते हुए जनसत्ता दल प्रमुख पर घरेलू हिंसा (Domestic Violence), विवाहेतर संबंध (एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर) और करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं व धोखाधड़ी जैसे बेहद गंभीर और संवेदनशील आरोप मढ़े हैं, जिसकी वजह से यह मामला राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
राउज एवेन्यू की विशेष अदालत में ही चलेगा मुकदमा
राजा भैया ने जुलाई 2024 में राउज एवेन्यू स्थित विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट (Special MP-MLA Court) द्वारा जारी समन को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उनके वकीलों का मुख्य तर्क यह था कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर याचिकाओं की सुनवाई सामान्य साकेत कोर्ट में होनी चाहिए, न कि जनप्रतिनिधियों के लिए बनी विशेष अदालत में। हालांकि, हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकान्ता शर्मा ने अपने ऐतिहासिक फैसले में राजा भैया की इस दलील को पूरी तरह अमान्य घोषित कर दिया। पीठ ने साफ कहा कि सांसदों और विधायकों के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए गठित राउज एवेन्यू की विशेष अदालत घरेलू हिंसा के मामलों की सुनवाई करने के लिए पूर्णतः सक्षम और वैधानिक अधिकार रखती है।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ही करेगी आपराधिक प्रकृति के मामलों की सुनवाई
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि भले ही घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मिलने वाले अधिकार और राहतें मुख्य रूप से सिविल (दीवानी) प्रकृति की दिखती हैं, लेकिन इस कानून में संरक्षण आदेशों का उल्लंघन करने पर कड़े दंडात्मक और आपराधिक प्रावधान भी शामिल हैं। इसी कानूनी बारीकी के कारण इन मुकदमों की सुनवाई मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा ही की जाती है और यह पूरी तरह आपराधिक प्रक्रिया संहिता के दायरे में आती है। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने राजा भैया की तरफ से दी गई ‘फोरम शॉपिंग’ (मनपसंद अदालत चुनने की कोशिश) संबंधी अन्य सभी दलीलों को भी खारिज कर दिया, जिससे अब उन्हें राउज एवेन्यू कोर्ट के कटघरे में खड़ा होना ही पड़ेगा।

