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West Bengal politics: ममता को झटका या अभिषेक से आर-पार? कल्याण बनर्जी के ‘अल्टीमेटम’ से TMC में मचा हड़कंप

West Bengal politics: पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। हालिया चुनाव में करारी शिकस्त झेलने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत की आग सुलग उठी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद और बेहद करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ नेता व सांसद कल्याण बनर्जी ने अब खुलकर बागी रुख अख्तियार कर लिया है। गुरुवार को उन्होंने ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला बोला। कल्याण बनर्जी का आरोप है कि ‘सिग्नेचर फॉर्जरी केस’ (हस्ताक्षर जालसाजी मामले) में उन्हें आखिरी वक्त पर वकील के पद से हटा दिया गया, जिसे उन्होंने अपना घोर अपमान बताया है।

तृणमूल कांग्रेस में नेतृत्व का संकट

कल्याण बनर्जी तृणमूल के उन चुनिंदा चेहरों में से एक रहे हैं, जिन्होंने हाल के संकटों में भी ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ा। लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। अपनी बेबाकी के लिए मशहूर सांसद ने पार्टी सुप्रीमो को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, “ममता बनर्जी को अब फैसला करना होगा कि वह अभिषेक बनर्जी को चुनती हैं या मुझ जैसे वफादार कार्यकर्ता को।” उन्होंने अभिषेक पर निशाना साधते हुए कहा कि वह बेहद अहंकारी हैं और उनके इसी व्यवहार के कारण 2022 में भी विवाद हुआ था। कल्याण ने साफ कर दिया कि जब तक अभिषेक पार्टी में हैं, उनका टीएमसी में रहना मुमकिन नहीं है।

कोलकाता उच्च न्यायालय का फैसला

इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट से अभिषेक बनर्जी को एक बड़ी राहत मिली है। अदालत ने सिग्नेचर फॉर्जरी केस में उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि, कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए अभिषेक को आज शाम 6 बजे तक पश्चिम बंगाल सीआईडी (CID) के सामने पेश होने का निर्देश दिया है। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में पहले कल्याण बनर्जी ही अभिषेक के वकील के तौर पर पैरवी करने वाले थे, लेकिन ऐन वक्त पर वे और उनके बेटे श्रीशान्य बनर्जी इस केस से अलग हो गए। कल्याण का दावा है कि आधी रात को उन्हें अपमानजनक तरीके से केस से हटाया गया।

राजनीतिक बदले की भावना का आरोप

भावुक और आक्रोशित कल्याण बनर्जी ने कहा कि वह आज भी ममता बनर्जी के प्रति वफादार हैं, लेकिन आत्मसम्मान से समझौता नहीं कर सकते। उन्होंने एक पुराना वाकया याद करते हुए दावा किया कि जब सीआईडी ने इस मामले में ममता बनर्जी के आवास पर छापेमारी की थी, तब वह वहां मौजूद थे। उन्होंने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच एजेंसी अपने साथ जिन दो गवाहों को लेकर आई थी, वे कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े हुए थे, जो इस पूरी कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।

संसद सदस्यों का लगातार इस्तीफा

तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किलें सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं हैं। पार्टी के अंदरूनी विवाद के कारण इस्तीफों की झड़ी लग गई है। गुरुवार (11 जून) को राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बाराइक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनसे पहले 8 जून को सुखेंदु शेखर रॉय और 10 जून को सुष्मिता देव भी इस्तीफा दे चुके हैं। पिछले चार दिनों में तीन सांसदों के जाने से राज्यसभा में टीएमसी की सदस्य संख्या 13 से घटकर महज 10 रह गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि अभी कई और लोकसभा और राज्यसभा सांसद इस्तीफा देने की कतार में हैं, जिससे ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

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