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Ayodhya Ram Mandir Scam: चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव पर गिरेगी गाज? SIT की बड़ी कार्रवाई!

Ayodhya Ram Mandir Scam: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दानराशि में हुई कथित हेराफेरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) अब आर-पार के मूड में नजर आ रहा है। जांच के आगे बढ़ने के साथ ही इस पूरे विवाद ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में तूल पकड़ लिया है। इस मामले में मुख्य संदिग्धों से लेकर बैंक कर्मचारियों तक, कई बड़े नाम जांच के दायरे में आ चुके हैं।

टिन्नू यादव पर कसता शिकंजा

राम मंदिर क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बेहद करीबी माने जाने वाले राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव इस पूरे गबन मामले के मुख्य संदिग्धों में से एक हैं। एसआईटी की टीम टिन्नू यादव के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है। आरोप है कि टिन्नू ने मंदिर के फंड से कथित तौर पर 50 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल अपने लिए एक आलीशान मकान बनवाने में किया। चंपत राय के साथ उनके कथित संबंधों की वजह से इस पूरे मामले पर सवाल और गहरे हो गए हैं। शुक्रवार को जांच के पांचवें दिन एसआईटी ने टिन्नू यादव से कड़ाई से पूछताछ की थी, और अब उन्हें जल्द ही हिरासत में लिया जा सकता है।

चढ़ावा हेराफेरी में बैंक और ट्रस्ट कर्मियों की भूमिका

एसआईटी केवल मुख्य आरोपियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस घोटाले की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसी जल्द ही उन कर्मचारियों पर शिकंजा कसने जा रही है जो मंदिर में आने वाले दान की गिनती (Donation Counting) के काम से जुड़े थे। इसके साथ ही कुछ बैंक कर्मचारियों को भी इस मामले में सह-आरोपी बनाया जा सकता है, जिनकी मिलीभगत या लापरवाही से इतनी बड़ी रकम की हेराफेरी मुमकिन हो सकी। इन सभी संदिग्धों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर इन्हें जल्द ही गिरफ्तार किया जा सकता है।

सीएम योगी को सौंपी जाएगी प्रारंभिक रिपोर्ट

आज इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच का छठवां दिन है। नियमों के मुताबिक एसआईटी को 7 दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की टीम आज ही लखनऊ वापस लौट सकती है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंपेगी। अब तक की जांच में एसआईटी ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तमाम बड़े पदाधिकारियों, डोनेशन काउंटिंग से जुड़े स्टाफ और संबंधित बैंक के कर्मचारियों के बयान दर्ज कर लिए हैं।

लापरवाह पदाधिकारियों को ट्रस्ट से बाहर का रास्ता

इस बड़ी चोरी और वित्तीय अनियमितता के सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर भी बड़े फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। जिन भी पदाधिकारियों या ट्रस्ट के सदस्यों की लापरवाही के कारण इतनी बड़ी सुरक्षा और वित्तीय चूक हुई, उन्हें ट्रस्ट से बाहर निकाला जा सकता है। मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इस दिशा में कड़े प्रशासनिक कदम उठाए जाने की पूरी संभावना है।

सोने और आभूषणों के रिकॉर्ड की स्क्रूटनी

एसआईटी ने अब तक इस मामले में 10 से अधिक मुख्य लोगों और मंदिर के स्टाफ से गहन पूछताछ की है। जांच का एक बड़ा हिस्सा मंदिर में चढ़ाए गए सोने, चांदी और अन्य कीमती आभूषणों के दस्तावेजों की स्क्रूटनी पर केंद्रित है। टीम इस बात का पता लगा रही है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए गहनों की वास्तविक मात्रा और मंदिर के कागजी रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों के बीच कितना अंतर (Mismatch) है। इसी अंतर के आधार पर एसआईटी गबन के वास्तविक पैमाने और अनियमितताओं का अंतिम निष्कर्ष निकालेगी।

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