Ram Mandir Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर के चढ़ावे और दान में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब अपने अगले चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव गृह और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद को सौंप दी है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मांग पर सरकार द्वारा इस उच्चस्तरीय एसआईटी का गठन किया गया था। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली इस टीम में आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। इस विशेष दल ने अयोध्या में लगातार छह दिनों तक डेरा डालकर मामले की सघन तफ्तीश की है।
एसआईटी की शुरुआती तफ्तीश और पूछताछ
इस पूरे डोनेशन स्कैम (दान घोटाले) की परतें खोलने के लिए जांच एजेंसी ने अयोध्या में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया। एसआईटी ने राम मंदिर परिसर और ट्रस्ट से जुड़े लगभग पांच दर्जन (60 से अधिक) लोगों से कड़ी पूछताछ की। शनिवार 13 जून को कमेटी के गठन के बाद सोमवार 15 जून से आधिकारिक रूप से छानबीन शुरू की गई थी, जो 20 जून तक चली। इसके बाद से ही लखनऊ और अयोध्या के प्रशासनिक गलियारों में इस गोपनीय रिपोर्ट को लेकर कयासों का दौर जारी था। आखिरकार, मंगलवार सुबह लखनऊ लौटकर टीम ने अपनी पहली विस्तृत फाइंडिंग्स शासन को सौंप दी हैं, जिससे अब आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
फाइनेंशियल फ्रॉड और गबन पर कानूनी कार्रवाई
प्रारंभिक रिपोर्ट के आधिकारिक तौर पर जमा होने के बाद अब प्रदेश सरकार की ओर से बड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस गोपनीय दस्तावेज में पैसों की हेराफेरी और चढ़ावे की चोरी से जुड़े कई अहम सबूतों का जिक्र है। इस रिपोर्ट के कानूनी मूल्यांकन के बाद वित्तीय गबन (Embezzlement) और चोरी की विभिन्न धाराओं के तहत नामजद मुकदमे (FIR) दर्ज कराए जा सकते हैं। इस संवेदनशील मामले में शामिल कुछ मुख्य संदिग्धों और कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन और गिरफ्तारी जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई भी बहुत जल्द देखने को मिल सकती है।
बाहरी रसूखदारों के नाम आए सामने
जैसे ही पहले चरण की यह रिपोर्ट गृह विभाग तक पहुंची, राम मंदिर प्रशासन से बाहर के कुछ नए और रसूखदार नामों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये संदिग्ध व्यक्ति राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सीधे कर्मचारी नहीं हैं, लेकिन ट्रस्ट के कुछ बेहद प्रभावशाली पदाधिकारियों के साथ इनके करीबी संबंध रहे हैं। इन बाहरी तत्वों ने इसी रसूख का फायदा उठाकर मंदिर के वित्तीय मामलों में दखलंदाजी की। कयास लगाए जा रहे हैं कि दूसरे चरण की व्यापक जांच (Phase 2 Investigation) के लिए एसआईटी जल्द ही दोबारा अयोध्या (रामधाम) का रुख करेगी और इन रसूखदारों को पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।
चढ़ावे में हेरफेर से लेकर कमीशनखोरी तक
शुरुआत में यह मामला केवल मंदिर के दैनिक चढ़ावे और नकदी की चोरी के आरोपों तक सीमित था। लेकिन जैसे-जैसे एसआईटी ने खातों और बही-खातों को खंगालना शुरू किया, शिकायतों और आरोपों की फेहरिस्त लंबी होती चली गई। प्रारंभिक रिपोर्ट में हालांकि चढ़ावे की रकम में हुए हेरफेर को ही मुख्य आधार बनाया गया है, लेकिन अब जांच का दायरा बढ़ चुका है। श्रद्धालुओं द्वारा दान में दी गई बहुमूल्य धातुओं (सोने-चांदी) के सदुपयोग पर उठ रहे सवालों और मंदिर निर्माण कार्य में भारी कमीशनखोरी (Kickbacks) के गंभीर आरोपों की भी गहन समीक्षा की जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

