Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या स्थित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और दान-पात्रों से जुड़े कथित विवाद को लेकर देश की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। उत्तर प्रदेश से शुरू हुई इस राजनीतिक जंग की गूंज अब महाराष्ट्र तक पहुंच चुकी है। सोमवार को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने इस संवेदनशील मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने अपने आधिकारिक मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय के माध्यम से केंद्र और यूपी सरकार पर सीधा हमला बोला है। शिवसेना (यूबीटी) ने तीखा रुख अपनाते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर मंदिर की संपत्तियों की उपेक्षा करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
कारसेवकों के बलिदान का अपमान
मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में अत्यंत कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए लिखा गया है कि जिस भव्य राम मंदिर के निर्माण और आंदोलन के लिए देश भर के लाखों कारसेवकों ने अपना खून बहाया और ऐतिहासिक बलिदान दिए, आज उसी पावन स्थल के चढ़ावे की सुरक्षा करने में सत्तासीन दल नाकाम साबित हो रहा है। उद्धव गुट ने दावा किया है कि ‘मंदिर विकास’ के बड़े-बड़े दावों की असलियत अब देश के सामने आ चुकी है, जहां रामलला के दान-पात्रों से नकदी, सोना, चांदी और बहुमूल्य गहनों की चोरी की जा रही है। पार्टी के अनुसार, इस प्रकार के पवित्र स्थान पर ऐसी घटना घटित होना सीधे तौर पर स्थानीय कानून-व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।
सोमनाथ मंदिर और महमूद गजनवी से तुलना
शिवसेना (यूबीटी) ने अपने राजनैतिक हमले को और धार देते हुए इस कथित घटनाक्रम की तुलना मध्यकालीन इतिहास के क्रूर आक्रमणकारी महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर में की गई ऐतिहासिक लूट से कर दी है। संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के नाम पर भारी लापरवाही हुई है। उद्धव ठाकरे गुट ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी तीखा प्रहार किया है। यह जुबानी हमला अमित शाह की कोल्हापुर में हुई हालिया जनसभा के बाद आया है, जहां उन्होंने एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना बताया था। पलटवार करते हुए सामना में पूछा गया है कि जो लोग अयोध्या की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं, वे अन्य ऐतिहासिक मंदिरों के विकास की बात कैसे कर सकते हैं।
विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरे मंदिर चढ़ावा विवाद पर केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश के अन्य प्रमुख विपक्षी दलों ने भी भाजपा और उत्तर प्रदेश शासन की घेराबंदी शुरू कर दी है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस संवेदनशील विषय को उठाते हुए सवाल दागा था कि इतने गंभीर आरोप सामने आने और भारी सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद इस मामले में अब तक कोई औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं की गई? विपक्ष इस मुद्दे को पारदर्शिता और जवाबदेही के मोर्चे पर सरकार को घेरने के लिए लगातार हवा दे रहा है।
यूपी सरकार का त्वरित एक्शन
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध और विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और त्वरित जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस विशेष पैनल में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी नील रतन को शामिल किया गया है। इस उच्च स्तरीय जांच दल को जल्द से जल्द घटनास्थल की बारीकी से पड़ताल कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

