Diljit Dosanjh: मशहूर अभिनेता और सिंगर दिलजीत दोसांझ की नई फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर इस समय फिल्म इंडस्ट्री और सोशल मीडिया पर भारी बवाल मचा हुआ है। ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘जी5’ (Zee5) पर रिलीज होने के महज दो दिनों के भीतर ही इस फिल्म को अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। इस अप्रत्याशित कदम के बाद प्रशंसकों में भारी नाराजगी है। इस पूरे विवाद पर खुद अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर एक लाइव सेशन के जरिए अपनी चुप्पी तोड़ी है और फिल्म को बैन करने वालों को करारा जवाब दिया है।
दिलजीत दोसांझ का बड़ा बयान
लाइव सेशन के दौरान दिलजीत दोसांझ ने बेहद सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि हमारी चार साल की कड़ी मेहनत रंग लाई है। आज का जो नया यूथ (युवा पीढ़ी) है, वह इस फिल्म के बारे में खुलकर बात कर रहा है।’ अभिनेता ने एक भावुक वीडियो का जिक्र करते हुए बताया कि एक जगह तो गुरुद्वारे में इस फिल्म को दिखाया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि आज घर-घर में महान एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा जी के बलिदान और उनके जीवन की चर्चा हो रही है, और हमारा असली मकसद भी यही था। दिलजीत ने साफ किया कि अब फिल्म को बैन करने या हटाने से कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है क्योंकि शुरुआती तीन दिनों में ही लाखों लोग इसे देख चुके हैं और कई लोगों ने तो इसे डाउनलोड भी कर लिया है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म की कार्रवाई पर उठाए सवाल
दिलजीत दोसांझ ने जी5 से फिल्म हटाए जाने की टाइमिंग पर भी गहरे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘हमें इस बात का अंदाजा पहले से ही था कि फिल्म के साथ ऐसा कुछ किया जाएगा और इसे हटा दिया जाएगा। लेकिन हमें उम्मीद थी कि कम से कम रविवार (संडे) तक यह प्लेटफॉर्म पर रहेगी ताकि लोग अपने पूरे परिवार के साथ इसे देख सकें, मगर उन्होंने उससे पहले ही इसे जबरन हटवा दिया।’
अभिनेता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर इस सच्चाई से लोग इतना क्यों डर रहे हैं। सिर्फ दो दिनों के भीतर ही फिल्म ने देश-दुनिया में जबरदस्त चर्चा हासिल कर ली थी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब इंटरनेट के दौर में किसी कंटेंट को एक बार अपलोड करने के बाद पूरी तरह डिलीट कर पाना नामुमकिन है।
फिल्म मेकिंग का दर्द
फिल्म निर्माण के दौरान आई बाधाओं को याद करते हुए दिलजीत काफी भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि ‘सतलुज’ की शूटिंग करना उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। शूटिंग के वक्त उन्हें कदम-कदम पर तकलीफें दी गईं और कई बार तो महज 15 दिनों के भीतर ही शूटिंग को बीच में ही रुकवा दिया जाता था।
उन्होंने फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान (हनी पाजी) को सलाम करते हुए कहा कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अपनी जिंदगी के चार साल लगा दिए। दोसांझ ने बुलंद आवाज में कहा, ‘आप हमारी आवाज को जितना दबाने की कोशिश करोगे, यह फिल्म उतनी ही ज्यादा चर्चा में आएगी। शहीद जसवंत सिंह खालरा जी की कुर्बानी को इस तरह बेकार नहीं जाने दिया जा सकता। जब तक जिंदा रहूंगा, हंसता रहूंगा क्योंकि पंजाब की मिट्टी में ही मोटिवेशन (प्रेरणा) है।’
राजनीति और व्यवस्था पर तीखा हमला
लाइव के आखिरी हिस्से में दिलजीत ने देश के राजनेताओं और व्यवस्था पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि वह कभी पॉलिटिशियन (राजनेता) नहीं बन सकते क्योंकि राजनीति केवल लोगों को डराकर और आपस में लड़वाकर ही की जा सकती है, जबकि वह हर इंसान से मोहब्बत करते हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि वह फिल्म हटने से निराश नहीं हैं, बल्कि इस बात से उदास हैं कि इतने साल बीत जाने के बाद भी समाज और व्यवस्था आज भी वहीं खड़ी है और लोगों के अंदर इंसानियत नाम की चीज नहीं बची है।
उन्होंने फिल्म का एक सीन पोस्ट करते हुए लिखा, ‘मैं इस अंधेरे को चुनौती देता हूँ। जो आज फिल्म ‘सतलुज’ के साथ हुआ, वही कभी शहीद जसवंत सिंह खालरा के साथ भी हुआ था।’ गौरतलब है कि यह फिल्म पंजाब में उग्रवाद के दौर में बिना कानूनी प्रक्रिया के हुई कथित हत्याओं और उसके खिलाफ न्याय की लड़ाई लड़ने वाले एक एक्टिविस्ट की वास्तविक कहानी पर आधारित है।

