Monsoon Alert: उत्तर भारत से लेकर दक्षिण और पश्चिम भारत तक दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने देश के बड़े हिस्से में अगले कुछ दिनों तक मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहने की चेतावनी दी है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मुंबई जैसे बड़े शहरों में रात से हो रही लगातार बरसात ने जहाँ भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है।
देशव्यापी मौसम का पूर्वानुमान
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, देश के उत्तर-पश्चिम, मध्य और तटीय पश्चिमी हिस्सों में मानसूनी हवाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। अगले कुछ दिनों तक बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्र, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना है। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और कर्नाटक के तटीय इलाकों के लिए भी तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। कई क्षेत्रों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की आशंका है।
दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत की स्थिति
दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई जिलों में बीती रात से ही रुक-रुक कर तेज बारिश हो रही है। मौसम विज्ञानियों ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, जम्मू-कश्मीर और केरल में भी मौसम बिगड़ने का अनुमान लगाया है। पहाड़ों पर हो रही लगातार बर्फबारी और बारिश के कारण निचले इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है, जिससे मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
महाराष्ट्र में तबाही और यातायात ठप
महाराष्ट्र में मानसूनी बारिश ने जमकर कहर बरपाया है। नासिक में गोदावरी नदी उफान पर आ गई है, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है। मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवाएं जलभराव के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। वहीं, पालघर के वसई-विरार क्षेत्र में पटरियों पर पानी जमा होने की वजह से गुजरात की ओर जाने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनों के पहिए थम गए हैं। कई संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की खबरें भी सामने आई हैं।
मानसून के इस सीजन का दर्दनाक आंकड़ा
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून को मानसून का सीजन शुरू होने के बाद से अकेले महाराष्ट्र में विभिन्न हादसों में 62 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 200 से अधिक मवेशियों की मौत हुई है। पालघर से प्रशासन की पोल खोलती एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई, जहाँ एम्बुलेंस न मिलने के कारण स्थानीय ग्रामीणों ने घर के दरवाजे को स्ट्रेचर बनाया और गर्भवती महिला को गहरे पानी के बीच से पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाया।
पिछले 24 घंटों का मौसम विश्लेषण
बीते 24 घंटों में कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और दक्षिण कर्नाटक के इलाकों में बादलों ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है, जहाँ 21 सेंटीमीटर या उससे अधिक अत्यंत भारी बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा मराठवाड़ा, सौराष्ट्र, कच्छ, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार और त्रिपुरा में 12 से 20 सेंटीमीटर तक पानी बरसा है। वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश रिकॉर्ड की गई है।
राहत के बाद बढ़ी जनता की आफत
शुरुआती दौर में उमस भरी गर्मी से परेशान लोगों को इस मानसूनी फुहार से राहत तो मिली, लेकिन प्रशासनिक तैयारियों की कमी के चलते यह राहत आफत में बदल गई है। जगह-जगह सड़कों पर हुए जलभराव के कारण गहरे गड्ढे छिप गए हैं, जिससे राहगीर हादसों का शिकार हो रहे हैं। प्रमुख शहरों की सड़कों पर किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया है, जिसके चलते नौकरीपेशा लोगों और आम जनता को घंटों गाड़ियों में फंसे रहना पड़ रहा है।

