Jauhar University Demolition: उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा विश्वविद्यालय के दर्जनों भवनों को गिराने (ध्वस्तीकरण) का आधिकारिक आदेश जारी किए जाने के बाद देश के प्रतिष्ठित मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद अरशद मदनी ने इस प्रशासनिक फैसले को पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण करार दिया है। गौरतलब है कि यह यूनिवर्सिटी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट रही है, जो वर्तमान में जेल में बंद हैं और इसके चांसलर (कुलपति) हैं।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष का तीखा पलटवार
जमीयत प्रमुख हजरत मौलाना सैयद अरशद मदनी ने यूनिवर्सिटी को ढहाने के आदेश पर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर विधिक सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के किसी मंदिर को इस तरह मलबे में तब्दील करना कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता।
“प्रशासन द्वारा जो कुछ भी किया जा रहा है, वह पूरी तरह से गलत है। अगर निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की तकनीकी या कागजी अनियमितताएं थीं भी, तो इस पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने या बुलडोजर चलाने से पहले मामले का पूरा फैसला देश की सक्षम अदालत (न्यायालय) द्वारा किया जाना चाहिए था। यदि कोई कानूनी उल्लंघन या नियमों की अनदेखी हुई भी है, तो सरकार विधिक दायरे में रहकर जुर्माना लगा सकती है। किसी भी विवाद में सीधे भवनों का ध्वस्तीकरण करना पहला या एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए।” – मौलाना सैयद अरशद मदनी, अध्यक्ष, जमीयत उलेमा-ए-हिंद
बिना नक्शे के अवैध निर्माण की प्रशासनिक रिपोर्ट
दूसरी तरफ, रामपुर जिला प्रशासन और विकास प्राधिकरण ने इस विध्वंस आदेश के पीछे के तकनीकी और कानूनी कारणों को स्पष्ट किया है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई किसी राजनीतिक प्रतिशोध के तहत नहीं, बल्कि नियमों के उल्लंघन के कारण की जा रही है।
रामपुर विकास प्राधिकरण की विस्तृत जांच और लंबी सुनवाई के बाद यह तथ्य सामने आया कि यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर बड़े पैमाने पर बिना स्वीकृत नक्शे के अवैध निर्माण किया गया है। चूंकि सरकारी नियमों के अनुसार बिना अप्रूव्ड मैप के किया गया कोई भी कमर्शियल या संस्थागत ढांचा अवैध माना जाता है, इसलिए विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद इसे गिराने का फैसला लिया गया।
जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी का आधिकारिक बयान
इस पूरे मामले पर रामपुर के जिलाधिकारी (डीएम) अजय कुमार द्विवेदी ने मीडिया को विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय के भवनों के निर्माण में नियमों की घोर अनदेखी की गई थी। जांच के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं।
डीएम अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार, “पूरी विधिक और पैमाइश की कार्रवाई संपन्न होने के बाद यह आधिकारिक रूप से पता चला है कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में कुल 40 विशाल भवनों का निर्माण किया गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से मात्र 2 भवनों का ही नक्शा सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृत कराया गया था, जबकि बाकी के 38 भवन बिना कोई नक्शा पास कराए ही अवैध रूप से तान दिए गए। इन सभी 38 बिल्डिंगों को पूर्णतः गैरकानूनी मानते हुए ही नियमानुसार ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया गया है।”
आपको बता दें कि साल 2006 में स्थापित हुई यह यूनिवर्सिटी अपने जन्मकाल से ही जमीन अधिग्रहण और सरकारी नियमों के उल्लंघन को लेकर विवादों के साए में रही है।

