NEET Paper Leak: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक मामलों को लेकर सियासत एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार (18 जुलाई) को केंद्र की मोदी सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। उन्होंने देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले परीक्षा माफियाओं के बेखौफ होकर काम करने के पीछे सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की शह को जिम्मेदार ठहराया। इसी सिलसिले में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखे सवालों की बौछार करते हुए एक चौंकाने वाला ‘रेट कार्ड’ जारी किया है, जिसने देश के सियासी गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमों तक में हड़कंप मचा दिया है।
कांग्रेस सांसद का तीखा ट्वीट वार
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत और बेहद आक्रामक पोस्ट साझा की है। उन्होंने अपने इस डिजिटल प्रहार के जरिए विभिन्न सरकारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में बिकने वाले प्रश्नपत्रों की कथित कीमतों का खुलकर खुलासा किया।
“देश में युवाओं के सुनहरे भविष्य की खुली नीलामी हो रही है। इस तथाकथित पेपर लीक का रेट कार्ड देखिए- NEET परीक्षा के लिए 40 लाख रुपये, IIT-JEE के लिए 15 लाख रुपये, उत्तराखंड पटवारी भर्ती के लिए 15 लाख रुपये, बिहार शिक्षक भर्ती के लिए 10 लाख रुपये और ओडिशा पुलिस भर्ती परीक्षा के लिए 25 लाख रुपये वसूले जा रहे हैं। आज हालात ऐसे हो चुके हैं कि जिसके पास अंधा पैसा है, वह इस भ्रष्ट मेन्यू से अपनी पसंद का पेपर चुन लेता है, जबकि दिन-रात सिर्फ अपनी कड़ी मेहनत के दम पर तैयारी करने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों का सपना पूरी तरह टूट जाता है।” – राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा
152 बार पेपर लीक होने का चौंकाने वाला आंकड़ा
कांग्रेस नेता ने केवल कीमतों का ही जिक्र नहीं किया, बल्कि देश में पिछले कुछ वर्षों में हुए कुल परीक्षा घोटालों की एक भयावह सांख्यिकी भी देश के सामने रखी। उन्होंने सरकार की कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की विफलता पर गंभीर उंगली उठाई।
राहुल गांधी ने दावा किया कि देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र में कुल मिलाकर अब तक 152 बार बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं, जिससे लगभग 7.5 करोड़ से अधिक होनहार छात्रों का करियर सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस महा-घोटाले के बावजूद अभी तक एक भी बड़े गुनहगार को सख्त कानूनी सजा नहीं मिली है। उन्होंने पीएम पर निशाना साधते हुए कहा, “यही इस परीक्षा माफिया की असली ताकत है कि वे बच्चों का भविष्य बेचते हैं, अंधा पैसा कमाते हैं और बिना किसी डर के बेखौफ घूमते हैं। मोदी जी, आज देश का हर एक छात्र आपसे सिर्फ यही एक सीधा सवाल पूछ रहा है कि आखिर किसके राजनीतिक संरक्षण में यह गिरोह इतना बेखौफ होकर देश को लूट रहा है?”
अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक पर दिल्ली पुलिस का एक्शन
राहुल गांधी के इस राजनीतिक हमले के बीच, दिल्ली के जंतर-मंतर पर इसी राष्ट्रीय मुद्दे को लेकर चल रहा जमीनी आंदोलन भी एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। परीक्षाओं में हो रही कथित अनियमितताओं और नीट विवाद के खिलाफ 21 दिनों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने धरना स्थल से जबरन हटा दिया है।
सोनम वांगचुक इस महा-घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण भूख हड़ताल पर डटे हुए थे। लंबे समय तक अन्न-जल त्यागने के कारण उनके शरीर की स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई थी, जिसके बाद कानून-व्यवस्था और मानवीय आधार पर पुलिस बल उन्हें वहां से उठाकर सीधे सफदरजंग अस्पताल ले गया।
सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. चारू बांबा की रिपोर्ट
सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के तुरंत बाद वहां के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम उनकी गहन चिकित्सकीय जांच में जुट गई है। अस्पताल प्रशासन ने उनकी मौजूदा शारीरिक स्थिति को लेकर एक आधिकारिक स्वास्थ्य बुलेटिन जारी किया है।
सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. चारू बांबा ने बताया कि वांगचुक की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है और उनके जीवन को कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। हालांकि, इतने लंबे समय तक उपवास और कठिन तपस्या के कारण उनके शरीर में पानी की कमी (हल्का डिहाइड्रेशन) और भारी शारीरिक कमजोरी साफ तौर पर दर्ज की गई है। दिल्ली पुलिस ने भी इस विधिक कार्रवाई पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि दिल्ली हाई कोर्ट के पुराने सुरक्षा निर्देशों और डॉक्टरों की आपातकालीन मेडिकल सलाह के आधार पर ही वांगचुक की जान बचाने के लिए उन्हें जबरन चिकित्सा वार्ड में भर्ती कराया गया है।

