Paper Leak Bill: करीब एक सप्ताह तक चले गतिरोध के बाद मंगलवार को लोकसभा में पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा शुरू हुई। सरकार ने इस विधेयक को सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा की दिशा में अहम कदम बताया। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने 2024 में बनाए गए कानून को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह संशोधन लाया है। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पेपर लीक कानून और परीक्षा सुधार पर सरकार का पक्ष
पेपर लीक कानून पर सरकार का पक्ष रखते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए पहले से लागू कानून को और मजबूत किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह संशोधन छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में विश्वास बहाल करना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
पेपर लीक विवाद पर कांग्रेस का हमला
पेपर लीक विवाद पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार को घेरते हुए कहा कि 2024 में कानून लागू होने के बावजूद प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं नहीं रुकीं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि पहले से सख्त कानून मौजूद था, तो फिर बार-बार पेपर लीक कैसे हुए। गोगोई ने कहा कि विधेयक की सामग्री पढ़ने से यह स्पष्ट होता है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर पर्याप्त गंभीर नहीं है। उन्होंने छात्रों के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को अपने भविष्य की चिंता में सड़कों पर उतरना पड़ा और सरकार को उनकी पीड़ा समझनी चाहिए।
एनटीए, शिक्षा मंत्री और छात्रों पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सरकार से मांगा जवाब
एनटीए और पेपर लीक मामले को लेकर गौरव गोगोई ने कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में कई छात्र आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं का शिकार हुए और इसके बावजूद जवाबदेही तय नहीं की गई। उन्होंने यह भी पूछा कि एनटीए के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। साथ ही, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित बल प्रयोग और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने गृह मंत्रालय से जवाब मांगा। गोगोई ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती बरती गई, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पेपर लीक संशोधन विधेयक में सख्त सजा का प्रावधान
पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान आरएसपी सांसद एन. के. प्रेमचंद्रन ने सुझाव दिया कि विधेयक को हितधारकों के व्यापक परामर्श के लिए 1 दिसंबर तक संबंधित समिति को भेजा जाए। उनका मानना था कि इससे कानून और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। सरकार द्वारा पेश किए गए संशोधन में पेपर लीक के दोषियों के लिए 10 वर्ष तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। यह विधेयक हाल के परीक्षा विवादों और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बाद लाया गया है। अब इस पर संसद में विस्तृत चर्चा और आगे की विधायी प्रक्रिया जारी रहेगी।

