Independence Day: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह को इस बार खास बनाने की तैयारी है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में पहली बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन को समारोह की प्रमुख विशेषताओं में शामिल किया गया है।
80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से गूंजेगा वंदे मातरम्
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ प्रस्तुत किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस के पारंपरिक कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत को इस तरह शामिल किया जाना पहली बार होगा। इससे इस साल का समारोह देश की आजादी के इतिहास और राष्ट्रीय चेतना से और गहराई से जुड़ता नजर आएगा।
स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम् का रहा अहम योगदान
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा संबंध रहा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की प्रसिद्ध रचना ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान देशवासियों में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आजादी की लड़ाई में यह गीत लंबे समय तक जनभावनाओं और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बना रहा। देश में ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत, जबकि ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान का दर्जा प्राप्त है।
लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में जुड़ेगा नया अध्याय
हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हैं। इसके साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने, राष्ट्रगान और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इस बार लाल किले से वंदे मातरम् का गायन समारोह को एक नया आयाम देगा। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह आयोजन स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय गीत के योगदान और देश की आजादी की यात्रा को याद करने का अवसर भी बनेगा।
वंदे मातरम् को लेकर हालिया कानूनी पहल भी चर्चा में
इसी बीच वंदे मातरम् से जुड़ा विधेयक भी चर्चा में है। दिए गए विवरण के मुताबिक, हाल ही में संसद के दोनों सदनों से संबंधित विधेयक पारित किया गया। इसके प्रावधानों में राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान जानबूझकर व्यवधान डालने या उसके अपमान को आपराधिक कृत्य के दायरे में लाने की बात कही गई है। ऐसे मामलों में तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान बताया गया है।
संविधान सभा के फैसले और वंदे मातरम् का सम्मान
विधेयक में 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के दिए गए बयान का भी उल्लेख किया गया है। इसमें ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ के सम्मान से जुड़े निर्णय की चर्चा है। उस समय ‘वंदे मातरम्’ को भी सम्मान दिए जाने की बात कही गई थी। विधेयक के मुताबिक, मौजूदा कानूनी व्यवस्था में राष्ट्रीय गीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसके अपमान के खिलाफ विशेष प्रावधान की कमी थी।
15 अगस्त पर देश देखेगा ऐतिहासिक नजारा
इस तरह 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से वंदे मातरम् का पहली बार गायन समारोह का प्रमुख आकर्षण बनने जा रहा है। एक ओर यह आयोजन स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों को ताजा करेगा, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगा। देशभर की निगाहें अब 15 अगस्त के इस विशेष आयोजन पर टिकी हैं।

