Kerala News: केरल में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन और कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने रविवार को स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाएंगे। दोनों नेताओं ने कहा कि केरल में पहले से चली आ रही परंपरा के मुताबिक सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का पूरा गायन नहीं किया जाएगा।
सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सिर्फ शुरुआती दो अंतरे
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राज्य में हमेशा की तरह राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कार्यक्रमों में पहले भी केवल शुरुआती दो अंतरों के गायन की परंपरा रही है और आगे भी इसी व्यवस्था को जारी रखा जाएगा।
मंत्री के इस बयान के बाद वंदे मातरम् के पूरे गायन को लेकर चल रही बहस ने एक बार फिर राजनीतिक रंग ले लिया है। राज्य सरकार के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के गायन को लेकर केंद्र के निर्देश और केरल की मौजूदा परंपरा के बीच चर्चा तेज हो गई है।
राजमोहन उन्नीथन बोले- केरल में पूरा वंदे मातरम् नहीं गाया जाएगा
कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने भी वंदे मातरम् के पूरे गायन को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि “केरल में इस जन्म में वंदे मातरम् पूरा नहीं गाया जाएगा।” एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें मुख्य सचिव की ओर से राष्ट्रगीत पूरा गाने के निर्देश की जानकारी नहीं थी, लेकिन राज्य में इसे पहले की तरह ही गाया जाएगा।
राजमोहन उन्नीथन ने कहा कि किसी भी दबाव के बावजूद वंदे मातरम् के गायन की मौजूदा परंपरा में बदलाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यक्रमों में इससे ज्यादा अंतरे नहीं गाए जाएंगे।
मुख्य सचिव के पत्र के बाद बढ़ा वंदे मातरम् विवाद
के. मुरलीधरन और राजमोहन उन्नीथन की प्रतिक्रिया केरल के मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा के 6 अगस्त के पत्र के बाद सामने आई है। इस पत्र में बताया गया था कि ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत वर्ष 2022 में शुरू किए गए अभियान के 2026 संस्करण को राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में आयोजित समारोहों के तीसरे चरण के साथ जोड़ा गया है।
इस फैसले को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति से मंजूरी मिलने की बात भी पत्र में कही गई थी। इसके बाद राज्य में सरकारी कार्यक्रमों के दौरान वंदे मातरम् के सामूहिक गायन को लेकर बहस शुरू हो गई।
हर घर तिरंगा अभियान में सामूहिक वंदे मातरम् गायन का निर्देश
मुख्य सचिव के पत्र के अनुसार, अभियान के तहत आयोजित होने वाले सभी भौतिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का सामूहिक गायन और राष्ट्रीय ध्वज फहराने या उसे प्रदर्शित करने की गतिविधियां शामिल होंगी। इसका उद्देश्य राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ावा देना बताया गया है।
पत्र में डिजिटल भागीदारी का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत नागरिक ‘हर घर तिरंगा’ पोर्टल के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज के साथ अपनी सेल्फी अपलोड कर सकेंगे। यह पहल इस वर्ष 9 अगस्त से 17 अगस्त तक चलने वाले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का हिस्सा है।
केंद्र के निर्देश और केरल की परंपरा के बीच टकराव
मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय से मिले संदेश के बाद जारी किया गया था। पत्र में कहा गया है कि वंदे मातरम् के गायन से संबंधित मामलों में भारत सरकार की ओर से जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
हालांकि, केरल के मंत्री और कांग्रेस सांसद के बयानों से संकेत मिलता है कि राज्य में सरकारी कार्यक्रमों के दौरान वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो अंतरे गाने की परंपरा को ही आगे बढ़ाया जाएगा। ऐसे में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के जश्न, हर घर तिरंगा अभियान और केरल की मौजूदा परंपरा के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है।

