UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव की राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर की गई टिप्पणी पर बसपा प्रमुख मायावती ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी के बारे में कहा था कि “हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है।” इस बयान को लेकर मायावती ने सपा प्रमुख पर तीखा हमला बोला।
जाट समाज से माफी की मांग, मायावती ने बयान को बताया अमर्यादित
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लगातार पोस्ट कर अखिलेश यादव की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने इस बयान को अमर्यादित, अशोभनीय और शर्मनाक बताया। मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव को सिर्फ जयंत चौधरी या रालोद से ही नहीं, बल्कि चौधरी चरण सिंह के परिवार और पूरे जाट समाज से भी माफी मांगनी चाहिए। उनके बयान के बाद सपा और बसपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गया है।
सपा की गठबंधन राजनीति पर मायावती का हमला, सहयोगियों को लेकर उठाए सवाल
बसपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी की गठबंधन राजनीति और उसके पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड पर भी सवाल खड़े किए। मायावती का आरोप है कि सपा का रवैया विपक्षी दलों के साथ-साथ अपने सहयोगी दलों के प्रति भी संकीर्ण और भरोसेमंद नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि सपा के इसी कथित रवैये के कारण कई राजनीतिक गठबंधन लंबे समय तक कायम नहीं रह सके और इसका चुनावी फायदा कई मौकों पर भाजपा को मिला।
सपा-बसपा गठबंधन और 1995 लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का किया जिक्र
मायावती ने अपने बयान में 1993 में सपा और बसपा के बीच हुए गठबंधन से लेकर 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड तक का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के कथित अहंकारी रवैये के कारण दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था। मायावती ने कहा कि इसके बाद राजनीतिक परिस्थितियां बेहद गंभीर हुईं और 2 जून 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस में उनके खिलाफ जानलेवा हमले की साजिश का आरोप लगा था।
2019 सपा-बसपा गठबंधन पर भी मायावती ने साधा निशाना
मायावती ने अखिलेश यादव के नेतृत्व में हुए सपा-बसपा गठबंधन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव की ओर से पुराने मतभेदों को दोबारा न दोहराने का भरोसा दिया गया था। हालांकि, चुनाव परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आने के बाद दोनों दलों के रिश्तों में फिर खटास पैदा हुई और गठबंधन टूट गया। मायावती ने इसके लिए सपा के कथित स्वार्थी और अहंकारी रवैये को जिम्मेदार बताया।
गठबंधन को लेकर सपा पर ‘स्वार्थी राजनीति’ का आरोप
मायावती ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी गठबंधन के जरिए अपना राजनीतिक हित साधने पर अधिक ध्यान देती है। उन्होंने कहा कि सपा अपना उद्देश्य पूरा होने के बाद सहयोगी दलों से दूरी बना लेती है और बाद में उन्हीं दलों के नेताओं के खिलाफ तीखी भाषा का इस्तेमाल करती है। मायावती ने इसे सपा की पुरानी राजनीतिक कार्यशैली बताते हुए सर्वसमाज के लोगों से ऐसी राजनीति से सतर्क रहने की अपील की।
अखिलेश यादव की PDA राजनीति पर मायावती का बड़ा हमला
बसपा प्रमुख ने अखिलेश यादव की PDA रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख राजनीतिक जरूरत के हिसाब से PDA में ‘P’ की अलग-अलग व्याख्या करते हैं। मायावती के मुताबिक, कभी इसे पिछड़ा वर्ग और कभी पंडित समाज के हितों से जोड़कर पेश किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि सपा की वास्तविक राजनीति पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और खासतौर पर ब्राह्मण समाज के हितों के अनुरूप नहीं रही है।
2027 चुनाव से पहले सपा-बसपा की जुबानी जंग हुई तेज
अखिलेश यादव के जयंत चौधरी पर बयान के बाद मायावती की प्रतिक्रिया ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर मायावती ने सपा की गठबंधन राजनीति और सामाजिक समीकरणों पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव की टिप्पणी को लेकर जाट समाज से माफी की मांग की है। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा, बसपा और अन्य दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और सामाजिक समीकरणों की लड़ाई और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

