UP Politics: कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक्सप्रेसवे, ऑनलाइन पेमेंट, वक्फ संपत्ति, सरकारी नौकरियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े आरोपों पर तीखा पलटवार किया। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव सत्ता में वापसी के लिए व्याकुल हैं, इसलिए उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हो रहे विकास कार्य पसंद नहीं आ रहे हैं।
सड़कों और एक्सप्रेसवे को लेकर राजभर ने कहा कि सड़कें बनने के बाद समय के साथ खराब भी हो सकती हैं और टूटने पर संबंधित ठेकेदार की जिम्मेदारी होती है कि वह उन्हें दोबारा बनवाए। उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव को सड़कों की इतनी चिंता है तो उन्हें अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में बनी सड़कों की स्थिति भी देखनी चाहिए।
ऑनलाइन पेमेंट पर चुंगी के आरोप को बताया भ्रम फैलाने वाला
ऑनलाइन पेमेंट पर चुंगी लगाए जाने के अखिलेश यादव के आरोप पर ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सपा अध्यक्ष को पूरी जानकारी नहीं है। राजभर के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था का असर अधिकांश लोगों पर नहीं पड़ेगा, जबकि सक्षम वर्ग पर ही इसका भार पड़ेगा। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह ऐसे मुद्दों को लेकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है।
राजभर ने सीएए-एनआरसी के विरोध का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय विपक्षी दलों ने बड़े पैमाने पर आंदोलन किए थे और दिल्ली का शाहीन बाग देशभर में चर्चा का विषय बना था। उन्होंने दावा किया कि कानून लागू होने के बावजूद तीन साल से अधिक समय में किसी मुसलमान को देश से बाहर नहीं किया गया।
वक्फ संपत्ति और रिकॉर्ड को लेकर विपक्ष पर निशाना
वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर राजभर ने कहा कि संपत्तियों का रिकॉर्ड दर्ज होने और उनका हिसाब-किताब सामने आने से विपक्ष परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान वक्फ की करोड़ों रुपये की संपत्तियां कम कीमत पर लेकर कहीं होटल, कहीं मॉल बनाए गए और कई संपत्तियों को बेच दिया गया।
राजभर ने कहा कि संपत्तियों को ‘उम्मीद’ पोर्टल पर दर्ज किए जाने से उनकी निगरानी और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था मजबूत होगी। उनके मुताबिक, इससे संपत्तियों में कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
सरकारी नौकरियों पर अखिलेश यादव के दावों का जवाब
सरकारी नौकरियों को लेकर अखिलेश यादव के आरोपों पर राजभर ने योगी सरकार के कार्यकाल का आंकड़ा सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार अब तक 9.5 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दे चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने अखिलेश यादव के कार्यकाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय सरकारी नौकरियों में पैसे के लेन-देन की शिकायतें होती थीं।
राजभर ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में विज्ञापन निकलने के बाद शिवपाल यादव और उनके करीबी लोग सक्रिय हो जाते थे तथा कथित तौर पर पांच, दस और पंद्रह लाख रुपये तक की बोली लगती थी। उन्होंने दावा किया कि पैसे लेने के बाद सूची तैयार होती थी, जिस पर अखिलेश यादव के हस्ताक्षर होते थे और विभाग उसी सूची को जारी करता था। हालांकि, ये आरोप राजभर के राजनीतिक दावे हैं।
कानून-व्यवस्था और दंगों को लेकर सपा सरकार पर हमला
साइबर अपराध और महिला अपराध को लेकर अखिलेश यादव की आलोचना पर राजभर ने सपा सरकार के कानून-व्यवस्था के रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश सरकार के दौरान प्रदेश में दंगे, कर्फ्यू और गैंगवार की घटनाएं हुईं। मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए उन्होंने तत्कालीन सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया।
राजभर ने दावा किया कि सपा सरकार के दौरान करीब एक हजार दंगे हुए और लगभग 1,200 लोगों की जान गई। उन्होंने कहा कि उस समय कई जिलों में माफिया और गैंगवार का प्रभाव था। इसके विपरीत राजभर ने योगी सरकार को कानून के राज वाली सरकार बताते हुए दावा किया कि अपराधियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जाती है।
मंदिर और नमाज के बयान पर भी अखिलेश यादव पर तंज
अखिलेश यादव के मंदिर निर्माण संबंधी बयान पर भी ओम प्रकाश राजभर ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण की बात करने वाले नेता दूसरी ओर मौलानाओं के साथ नमाज पढ़ने भी जाते हैं। राजभर ने सवाल उठाया कि क्या एक ही समय में मंदिर निर्माण और नमाज से जुड़े राजनीतिक संदेशों के जरिए अलग-अलग वर्गों को साधने की कोशिश की जा रही है।
राजभर के इन बयानों से साफ है कि एक्सप्रेसवे, ऑनलाइन पेमेंट, वक्फ संपत्ति, सरकारी नौकरियों और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर उत्तर प्रदेश की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आगामी राजनीतिक बहस में इन मुद्दों पर दोनों दलों के दावों और उनके समर्थन में पेश किए जाने वाले आंकड़ों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।

