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UP Politics: सपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए दो उम्मीदवार उतारे, तीसरी सीट के लिए शुरू हुई सियासी कवायद

UP Politics: समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने दो उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव के साथ कॉरपोरेट जगत से जुड़े धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों प्रत्याशियों ने बुधवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। इस घोषणा के साथ ही उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

रामगोपाल यादव के साथ कॉरपोरेट जगत के धनराज नथवानी को मौका

रामगोपाल यादव समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ और प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वहीं धनराज परिमल नथवानी की पहचान कॉरपोरेट जगत और खेल प्रशासन से जुड़े व्यक्ति के रूप में है। वह वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत हैं। नथवानी को उद्योगपति मुकेश अंबानी के परिवार के करीबी लोगों में भी गिना जाता है।

परिमल नथवानी के बेटे हैं धनराज, पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से भी जुड़ाव

धनराज नथवानी, राज्यसभा सांसद और उद्योग जगत से जुड़े परिमल नथवानी के बेटे हैं। परिमल नथवानी ने लंदन के रीजेंट बिजनेस स्कूल से इंटरनेशनल बिजनेस में स्नातक की शिक्षा हासिल की है। उन्हें पर्यावरण, वन्यजीव संरक्षण और फोटोग्राफी में विशेष रुचि है। गुजरात के वन्यजीवों, खासकर गिर के शेरों के संरक्षण से जुड़े अभियानों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।

राज्यसभा चुनाव का गणित: एक सीट के लिए 37 वोट जरूरी

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को विधानसभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करेंगे। मौजूदा चुनावी गणित के मुताबिक एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 37 मतों की आवश्यकता होगी। ऐसे में राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए विधायकों के समर्थन का हिसाब लगा रहे हैं।

सपा के पास 95 विधायक, सहयोगी और वापसी की उम्मीद से बढ़ सकती है संख्या

सपा के पास वर्तमान में 95 विधायकों का संख्याबल बताया जा रहा है। इनमें वे चार विधायक शामिल नहीं हैं जिन्होंने पिछले राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संजय सेठ के पक्ष में मतदान किया था। इन विधायकों में राकेश पांडेय, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्य के नाम शामिल हैं। पूजा पाल भाजपा की पदाधिकारी हैं, इसलिए उनके सपा के पक्ष में मतदान करने की संभावना नहीं मानी जा रही है।

सुभासपा विधायकों के समर्थन से सपा को 99 वोट मिलने की उम्मीद

सपा को अपने कुछ पुराने समर्थक विधायकों के दोबारा साथ आने की उम्मीद है। पार्टी रणनीतिकारों के अनुसार, राकेश पांडेय, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्य में से दो विधायकों के समर्थन में लौटने की संभावना है। इसके अलावा सुभासपा के दो विधायक जगदीश नारायण राय और मो. अब्बास अंसारी के समर्थन की भी उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी के रणनीतिकारों का दावा है कि इस स्थिति में सपा के पास करीब 99 मतों का आंकड़ा हो सकता है।

तीसरी राज्यसभा सीट के लिए 12 अतिरिक्त वोटों की जरूरत

एक उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए 37 वोटों की जरूरत के हिसाब से तीन उम्मीदवारों के लिए कुल 111 मत आवश्यक होंगे। सपा के पास संभावित 99 वोट होने की स्थिति में पार्टी को तीसरे उम्मीदवार की जीत के लिए करीब 12 अतिरिक्त मतों की आवश्यकता पड़ेगी। यही वजह है कि तीसरी राज्यसभा सीट के लिए सपा की रणनीति और संभावित क्रॉस-सपोर्ट पर सबकी नजर है।

भाजपा विधायकों और सपा के बागी विधायकों पर निगाह

सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि भाजपा के कुछ ऐसे विधायक, जिन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट कटने की आशंका है, सपा के संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि इन विधायकों से राज्यसभा चुनाव में समर्थन के बदले विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट का प्रस्ताव रखा गया है। इसी तरह सपा अपने उन बागी विधायकों को भी अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है, जो पिछले राज्यसभा चुनाव में पार्टी लाइन से अलग गए थे।

खुले मतदान की वजह से राज्यसभा चुनाव में बढ़ी सियासी अहमियत

राज्यसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया सामान्य गुप्त मतदान से अलग होती है। राजनीतिक दलों के अधिकृत एजेंट को वोट दिखाकर मतदान किया जाता है। ऐसे में विधायकों के समर्थन को लेकर पार्टियां मतदान से पहले अपनी रणनीति को लगातार मजबूत करने में जुटी हैं। अब सपा के दो उम्मीदवारों के नामांकन के बाद सबसे बड़ा सवाल तीसरे उम्मीदवार के लिए जरूरी अतिरिक्त वोट जुटाने को लेकर है।

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