UP News: उत्तर प्रदेश में रोजगार और सरकारी नौकरी को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के उस बयान पर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने युवाओं से नौकरी के पीछे भागने के बजाय स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की थी। उनके बयान के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए रोजगार के मुद्दे पर सवाल उठाए हैं।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार एक ओर युवाओं को रोजगार और सरकारी नौकरियों के अवसर उपलब्ध कराने का दावा करती है, जबकि दूसरी ओर युवाओं को ई-रिक्शा चलाने जैसे काम करने की सलाह दी जा रही है। इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा तेज हो गई है।
ई-रिक्शा और स्वरोजगार पर क्या बोले डिप्टी सीएम बृजेश पाठक?
दरअसल, बृजेश पाठक ने लखनऊ में ‘भारत टैक्सी’ योजना की लॉन्चिंग के दौरान युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया था। उन्होंने खास तौर पर उन युवाओं का जिक्र किया, जिन्हें ड्राइविंग आती है और जो नौकरी की तलाश में हैं। पाठक ने कहा था कि युवाओं को केवल नौकरी के पीछे भागने के बजाय अपना रोजगार शुरू करने के विकल्प पर भी विचार करना चाहिए।
उनके बयान में ई-रिक्शा चलाने का भी उल्लेख था। उन्होंने कहा था कि अगर कोई युवा ई-रिक्शा चलाकर अपना रोजगार करता है तो इससे उसे कमाई के साथ-साथ अपने परिवार और बच्चों के साथ समय बिताने का अवसर भी मिल सकता है। हालांकि, इसी टिप्पणी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया।
नौकरी बनाम स्वरोजगार पर विपक्ष का हमला
बृजेश पाठक के बयान पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने सरकार की रोजगार नीति पर सवाल खड़े किए। सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज समेत कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें वैकल्पिक और छोटे व्यवसायों की ओर जाने की सलाह दे रही है।
विपक्ष की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि यदि सरकार बड़े पैमाने पर रोजगार और सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराने का दावा करती है, तो युवाओं को नौकरी के बजाय ई-रिक्शा चलाने की सलाह क्यों दी जा रही है।
ओमप्रकाश राजभर ने किया बृजेश पाठक का बचाव
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने बृजेश पाठक के बयान का बचाव किया है। राजभर ने कहा कि इसमें बुरा मानने वाली कोई बात नहीं है। उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 25 करोड़ है और सरकार इतनी बड़ी आबादी के हर व्यक्ति को सरकारी नौकरी नहीं दे सकती।
‘जिसे नौकरी नहीं मिल रही, वह दूसरा काम कर सकता है’
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि जो लोग योग्य हैं, उन्हें नौकरी मिल रही है, लेकिन जिन लोगों को सरकारी नौकरी नहीं मिल रही, वे दूसरे रोजगार के विकल्प अपना सकते हैं। उन्होंने कहा कि बृजेश पाठक ने भी युवाओं को इसी दिशा में सोचने की बात कही है।
राजभर ने अपने व्यक्तिगत अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी कभी टेम्पो चलाया था और आज सरकार चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी काम को छोटा या बड़ा समझना उचित नहीं है। उनके मुताबिक मेहनत और रोजगार का सम्मान किया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में रोजगार बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
बृजेश पाठक के बयान और ओमप्रकाश राजभर के बचाव के बाद उत्तर प्रदेश में रोजगार, सरकारी नौकरी और स्वरोजगार को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। एक तरफ विपक्ष सरकारी नौकरियों और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार से सवाल कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को रोजगार का एक महत्वपूर्ण विकल्प बता रहा है।
चुनावी माहौल की ओर बढ़ रहे उत्तर प्रदेश में रोजगार का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में बृजेश पाठक का ई-रिक्शा वाला बयान आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।

