UP Politics: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। बुधवार को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने अभी अपने उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक भाजपा की ओर से आठ नामांकन पत्र खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। सपा की ओर से चार नामांकन पत्र खरीदे जाने की बात कही जा रही है।
ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर हमला
राज्यसभा चुनाव के बीच सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। राजभर ने सवाल उठाया कि यदि सपा तीन उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो क्या तीनों उसके ‘PDA’ फॉर्मूले के अनुरूप होंगे। उन्होंने PDA की अपनी व्याख्या करते हुए परिवार, दौलतमंद और अपराधी जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और सपा की रणनीति पर सवाल खड़े किए।
तीसरे उम्मीदवार को लेकर राजभर का सियासी तंज
राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि सपा के पहले उम्मीदवार रामगोपाल यादव ‘परिवार’ से आते हैं और अब ‘D’ तथा ‘A’ को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पिछड़े, दलित और मुस्लिम समुदायों का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव से जवाब मांगा। साथ ही उन्होंने सपा को सलाह दी कि तीसरे उम्मीदवार के चक्कर में दूसरे उम्मीदवार की जीत का गणित खराब न हो जाए।
यूपी राज्यसभा चुनाव का गणित: 37 वोट पर एक सीट
उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक भाजपा के पास 256 विधायक हैं। समाजवादी पार्टी के 101 विधायक बताए जा रहे हैं। इसके अलावा अपना दल (एस) के 13, आरएलडी के 9, सुभासपा के 6, निषाद पार्टी के 5, कांग्रेस के 2 और जनसत्ता दल के 2 विधायक हैं। तीन विधायक असंबद्ध बताए जा रहे हैं, जबकि छह विधानसभा सीटें खाली हैं।
एक राज्यसभा सीट के लिए 37 विधायकों का समर्थन जरूरी
राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होगी। इसी आधार पर भाजपा अपने दम पर सात सीटों के लिए पर्याप्त संख्या में वोट रखती है, जबकि सपा अपने मौजूदा संख्याबल के आधार पर दो उम्मीदवारों को आसानी से जिताने की स्थिति में दिखाई देती है। ऐसे में चुनाव की असली तस्वीर दसवीं सीट को लेकर बनती नजर आ रही है।
BJP के 8वें राज्यसभा सांसद के लिए दो वोटों की कमी
NDA के पास 294 वोट, आठवीं सीट के लिए चाहिए 296
भाजपा के 256 विधायकों के साथ अपना दल (एस), आरएलडी, सुभासपा और निषाद पार्टी के विधायकों को जोड़ने पर एनडीए के पास 289 वोट होते हैं। जनसत्ता दल के दो विधायकों और तीन असंबद्ध विधायकों को शामिल करने पर यह आंकड़ा 294 तक पहुंचता है। आठ राज्यसभा सांसदों को जिताने के लिए 296 वोट चाहिए। इस हिसाब से एनडीए को दो अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।
सुभासपा के चार विधायक बना सकते हैं चुनावी पेच
राज्यसभा चुनाव के गणित में सुभासपा के चार विधायक अहम भूमिका निभा सकते हैं। इनमें अब्बास अंसारी, जगदीश नारायण राय, दूधराम और हंसूराम के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये विधायक सपा के साथ नजर आते रहे हैं। यदि ये विधायक एनडीए के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान नहीं करते हैं तो भाजपा के आठवें उम्मीदवार के लिए आवश्यक वोटों की कमी और बढ़ सकती है।
सपा के तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार के लिए 4 वोटों की जरूरत
समाजवादी पार्टी के 101 विधायकों के साथ कांग्रेस के दो और सुभासपा के चार विधायकों को जोड़ने पर सपा खेमे का संभावित आंकड़ा 107 पहुंचता है। तीन राज्यसभा सीटों पर जीत के लिए 111 वोटों की आवश्यकता होगी। यानी मौजूदा गणित के आधार पर सपा को तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए चार अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
पुराने बागी विधायक फिर बदल सकते हैं राज्यसभा चुनाव का समीकरण
सपा के लिए चुनौती इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि पिछले राज्यसभा चुनाव में पार्टी के कई विधायक बागी होकर भाजपा के साथ चले गए थे। पूजा पाल भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और मनोज पांडेय बतौर निर्दलीय भाजपा के पक्ष में रहे हैं। इसके अलावा विनोद चतुर्वेदी, राकेश पांडेय और आशुतोष मौर्य ने भी पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था।
राज्यसभा चुनाव में जोड़तोड़ पर टिकी नजर
यदि सपा से जुड़े तीन विधायक इस बार भी भाजपा के पक्ष में मतदान करते हैं तो सपा के तीसरे उम्मीदवार के लिए वोटों की कमी चार से बढ़कर सात तक पहुंच सकती है। दूसरी ओर, सुभासपा के चार विधायकों के समर्थन को लेकर स्थिति भी भाजपा के आठवें उम्मीदवार के गणित को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के लिए अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाना महत्वपूर्ण होगा।
राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ा सियासी रोमांच
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले होने वाला यह राज्यसभा चुनाव दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है। फिलहाल भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, जबकि सपा अपने दो उम्मीदवारों का नामांकन करा चुकी है। अब निगाहें भाजपा के उम्मीदवारों, सपा के संभावित तीसरे प्रत्याशी और उन विधायकों पर टिकी हैं, जिनका रुख राज्यसभा चुनाव के अंतिम गणित को प्रभावित कर सकता है।

