UP Flood: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर में नारायणी नदी के एपी तटबंध टूटने से प्रभावित बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने बांध कटान स्थल का हवाई सर्वेक्षण किया और प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और राहत सामग्री किट तथा लंच पैकेट वितरित किए।
नेपाल से आए पानी से बढ़ा नारायणी नदी का जलस्तर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई वर्षों बाद इस स्तर की बाढ़ की स्थिति सामने आई है। नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर आने से नारायणी नदी का जलप्रवाह अचानक बढ़ गया। सामान्य दिनों में नदी में करीब 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह रहता है, जबकि बाढ़ के दौरान यह बढ़कर लगभग साढ़े पांच लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। अत्यधिक जलप्रवाह के दबाव के कारण एपी तटबंध टूट गया और आसपास के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत-बचाव में जुटीं
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। एनडीआरएफ की दो टीमें, एसडीआरएफ की दो टीमें और पीएसी की फ्लड यूनिट प्रभावित क्षेत्रों में तैनात की गई हैं। जिला प्रशासन तथा सिंचाई विभाग के अभियंता लगातार राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं। तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू कर दिए।
5,000 राहत सामग्री पैकेट किए गए उपलब्ध
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए सरकार की ओर से 5,000 राहत सामग्री पैकेट उपलब्ध कराए गए हैं। प्रत्येक पैकेट में करीब 50 किलो सामग्री है, जिसमें 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, 2 किलो दाल के साथ लाई, चना, तेल, मसाले, नमक और बाल्टी समेत कुल 35 आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री समय से पहुंचाने के निर्देश दिए।
बाढ़ पीड़ितों को आर्थिक सहायता और आवास का निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ में जनहानि होने पर संबंधित परिवार को तत्काल चार लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाए। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। जिन मकानों की मरम्मत संभव है, उनके लिए आवश्यक आर्थिक सहायता देने को भी कहा गया।
फसल नुकसान का सर्वे, किसानों को 10 दिन में मुआवजा
बाढ़ से कुशीनगर के करीब 15 से 16 गांवों में धान, गन्ना और सब्जियों सहित विभिन्न फसलों के प्रभावित होने की आशंका है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फसल क्षति का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को 10 दिनों के भीतर मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत जल्द कराने को कहा गया।
स्वास्थ्य सेवाओं और राहत शिविरों पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में अगले 5 से 6 दिनों तक स्वास्थ्य शिविर संचालित करने के निर्देश दिए। बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-स्नेक वेनम और एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। जिन गांवों में पानी भर गया है या जिनके मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, वहां के लोगों को सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाने के निर्देश दिए गए। शिविरों में पका हुआ भोजन, बिजली और जरूरत पड़ने पर जनरेटर की व्यवस्था करने को कहा गया।
एपी तटबंध को मजबूत करने और नारायणी नदी के चैनलाइजेशन की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा बाढ़ की स्थिति से निपटने के साथ भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचाव के लिए स्थायी समाधान पर भी काम किया जाना चाहिए। उन्होंने नारायणी नदी की ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन की संभावना पर कार्य करने की बात कही। नदी से निकली सिल्ट को दोनों किनारों पर डालने से नदी की गहराई बढ़ाने और किसानों के खेतों को नुकसान से बचाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई। साथ ही एपी तटबंध को मजबूत करने के निर्देश दिए गए, ताकि भविष्य में तटबंध टूटने की स्थिति से क्षेत्र को सुरक्षित रखा जा सके।
जल शक्ति मंत्री और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
दौरे के दौरान जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, सांसद शशांक मणि और विजय कुमार दूबे, विधायक डॉ. असीम कुमार तथा सुरेंद्र कुमार कुशवाहा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को प्रभावित परिवारों के बीच रहकर राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

