UP News: उत्तर प्रदेश में मरीजों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए योगी सरकार ने एंबुलेंस के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। परिवहन विभाग की ओर से तीन दिनों तक चले इस अभियान में नियमों का उल्लंघन करने वाली 772 एंबुलेंस के चालान किए गए, जबकि 135 एंबुलेंस को बंद कराया गया। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर चल रही एंबुलेंस को निर्धारित नियमों के दायरे में लाना और मरीजों को सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
सरकार के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान के दौरान निजी क्षेत्र में संचालित एंबुलेंस की जांच की गई। जांच में जिन वाहनों में नियमों का उल्लंघन पाया गया, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। परिवहन विभाग ने साफ किया कि मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस का सुरक्षित और नियमों के मुताबिक संचालन बेहद जरूरी है।
772 एंबुलेंस के चालान, 135 वाहनों का संचालन बंद
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग की प्रवर्तन टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर निजी एंबुलेंस की जांच की। इस दौरान नियमों का पालन नहीं करने वाली एंबुलेंस के खिलाफ कार्रवाई की गई। कुल 772 एंबुलेंस के चालान किए गए, जबकि 135 एंबुलेंस को बंद कराया गया।
अधिकारियों का कहना है कि एंबुलेंस एक आपातकालीन सेवा है। ऐसे में इसके संचालन में लापरवाही मरीजों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। कई बार मरीज की हालत गंभीर होती है और उसे जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है। ऐसी स्थिति में एंबुलेंस का फिट होना और उसके सभी जरूरी कागजात पूरे होना बेहद अहम है।
एंबुलेंस की फिटनेस और वैध दस्तावेज जरूरी
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने कहा कि एंबुलेंस का इस्तेमाल आपातकालीन परिस्थितियों में किया जाता है। इसलिए उसका तकनीकी रूप से फिट होना और जरूरी दस्तावेजों का वैध होना जरूरी है। अनफिट या बिना अधिकृत अनुमति के चलने वाली एंबुलेंस मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
उन्होंने बताया कि अभियान के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि एंबुलेंस संचालक तय नियमों और मानकों का पालन करें। इसका मकसद केवल चालान करना नहीं, बल्कि एंबुलेंस सेवाओं को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना भी है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आपातकालीन स्थिति में बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
एंबुलेंस संचालक इन जरूरी दस्तावेजों को रखें तैयार
परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों और एंबुलेंस संचालकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों के सभी जरूरी दस्तावेज पूरे रखें। एंबुलेंस का पंजीकरण, वैध परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक अभिलेख मानकों के अनुसार होने चाहिए।
विभाग ने कहा कि एंबुलेंस को सड़कों पर उतारने से पहले उसकी फिटनेस और दस्तावेजों की जांच जरूर कर लें। नियमों का पालन करने से न केवल कानूनी कार्रवाई से बचा जा सकता है, बल्कि मरीजों को अस्पताल ले जाने के दौरान होने वाली परेशानियों को भी कम किया जा सकता है।
यूपी में अवैध एंबुलेंस के खिलाफ आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
परिवहन विभाग के मुताबिक, अनफिट और अवैध रूप से संचालित एंबुलेंस के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग का लक्ष्य एंबुलेंस सेवाओं में नियमों का पालन सुनिश्चित करना और सड़क पर चलने वाले वाहनों की सुरक्षा बढ़ाना है।
इस कार्रवाई से एंबुलेंस संचालकों को भी यह संदेश दिया गया है कि आपातकालीन सेवा होने के बावजूद नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती। मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहनों की फिटनेस, वैध परमिट और जरूरी दस्तावेजों का ध्यान रखना अनिवार्य है।

