Neha Bora News: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के उस नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें उनसे शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का बॉन्ड भरने को कहा गया था। यह नोटिस नई दिल्ली के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने जारी किया था।
नेहा बोरा ने अपनी कानूनी चुनौती में नोटिस को पूरी तरह असंवैधानिक बताया है। उनकी मांग है कि इसे तुरंत रद्द किया जाए। उनका मामला ऐसे समय में हाईकोर्ट पहुंचा है, जब दिल्ली में छात्र संगठनों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दशहरा की छुट्टियों में भी जल्द सुनवाई की मांग, मुख्य न्यायाधीश के सामने रखा जाएगा मामला
दिल्ली हाईकोर्ट में दशहरा की छुट्टियां चल रही हैं, लेकिन नेहा बोरा की कानूनी टीम मामले को जल्द सुनवाई के लिए रखने की तैयारी में है। टीम मुख्य न्यायाधीश के सामने अपनी याचिका रखकर तत्काल सुनवाई की मांग करेगी।
नेहा बोरा की ओर से अधिवक्ता अभीक चिमनी, प्रांजल अब्रोल और मोक्ष कानूनी पैरवी कर रहे हैं। उनकी टीम स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में भी पेश होगी। वहां नोटिस का औपचारिक जवाब दाखिल किया जाएगा और मजिस्ट्रेट को बताया जाएगा कि इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च से पहले हिरासत, 17 अक्टूबर को रिहाई
पूरा मामला 16 अक्टूबर का है। नेहा बोरा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने जा रही थीं। इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया था।
17 अक्टूबर को औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। हालांकि, रिहाई के अगले दिन यानी 18 अक्टूबर को पुलिस ने उन्हें एक और नोटिस थमा दिया। इस नोटिस ने अब कानूनी विवाद का रूप ले लिया है।
BNSS की धारा 126 और 130 के तहत नोटिस, 19 अक्टूबर को पेश होने का आदेश
पुलिस की ओर से जारी नोटिस पर 17 अक्टूबर की तारीख दर्ज थी। इसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के साथ धारा 135(3) का हवाला दिया गया था।
नोटिस के मुताबिक, नेहा बोरा को 19 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे नई दिल्ली के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना था। उनसे 10 हजार रुपये का शांति बॉन्ड भरने और जमानत राशि जमा कराने को कहा गया था। पुलिस की कार्रवाई का आधार शांति भंग होने की आशंका बताया गया।
क्या है BNSS की धारा 126? शांति भंग की आशंका पर बॉन्ड भरवाने का प्रावधान
BNSS की धारा 126 के तहत, अगर मजिस्ट्रेट को भरोसेमंद जानकारी मिलती है कि कोई व्यक्ति शांति भंग कर सकता है या सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ सकता है, तो उसे शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने का आदेश दिया जा सकता है।
ऐसी कार्रवाई एहतियाती होती है, यानी इसका मकसद किसी संभावित विवाद या कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकना होता है। हालांकि, नेहा बोरा ने पुलिस के इस कदम को चुनौती दी है और अब उनकी याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई का इंतजार है।
फिलहाल, मामले में हाईकोर्ट की ओर से किसी आदेश की जानकारी सामने नहीं आई है। नेहा बोरा की कानूनी टीम नोटिस रद्द कराने और जल्द सुनवाई के लिए प्रयास कर रही है।

