India Nepal Relations: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह नवंबर 2026 के तीसरे या चौथे सप्ताह में भारत दौरे पर आ सकते हैं। मार्च में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा होगी। इस दौरे में भारत और नेपाल के बीच व्यापार, निवेश, सीमा विवाद, सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।
भारत दौरे पर आ सकते हैं नेपाल के PM बालेंद्र शाह, तैयारियां शुरू
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह जल्द ही भारत के दौरे पर आ सकते हैं। माना जा रहा है कि वह नवंबर 2026 के तीसरे या चौथे सप्ताह में नई दिल्ली पहुंच सकते हैं। हालांकि, अभी तक उनकी यात्रा की आधिकारिक तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। मार्च में प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद यह उनका पहला द्विपक्षीय विदेश दौरा होगा।
इस यात्रा को भारत और नेपाल के रिश्तों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल, पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच कई मुद्दों को लेकर राजनयिक मतभेद सामने आए हैं। अब दोनों सरकारें इन दूरियों को कम करके आपसी संबंधों को मजबूत करने की कोशिश में जुटी हैं।
बालेंद्र शाह के भारत दौरे की तैयारियों को लेकर भी हलचल तेज हो गई है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी 4 नवंबर को काठमांडू पहुंचेंगे। इस दौरान वह नेपाली अधिकारियों के साथ अहम मुद्दों पर बातचीत करेंगे। वहीं, नेपाल में भारत के नए राजदूत सुधाकर दलेला के भी जल्द अपना कार्यभार संभालने की उम्मीद है।
भारत-नेपाल व्यापार और आर्थिक सहयोग पर रहेगा जोर
बालेंद्र शाह की भारत यात्रा के दौरान व्यापार और आर्थिक सहयोग सबसे अहम मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। नेपाल की सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) भारत के साथ अपने रिश्तों को नए सिरे से आगे बढ़ाना चाहती है। पार्टी का जोर व्यापार, निवेश और विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर है।
नेपाल की तरफ से भारत से हाइड्रोपावर, इंफ्रास्ट्रक्चर और टूरियम जैसे क्षेत्रों में ज्यादा निवेश की मांग उठाई जा सकती है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार और ट्रांजिट व्यवस्था को आसान बनाने पर भी चर्चा संभव है।
नेपाल चाहता है कि भारतीय निवेशकों के लिए वहां निवेश के नए रास्ते खुलें। वहीं, दोनों देश व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए नए समझौतों पर भी विचार कर सकते हैं।
कालापानी-लिपुलेख सीमा विवाद पर फिर हो सकती है चर्चा
भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद भी इस यात्रा का संवेदनशील मुद्दा रह सकता है। खासतौर पर कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं।
नेपाल इन इलाकों पर अपना दावा करता रहा है, जबकि भारत नेपाल के इस दावे को स्वीकार नहीं करता। ऐसे में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की भारत यात्रा के दौरान इस विवाद पर बातचीत होने की संभावना है।
हालांकि, इस मुद्दे का समाधान निकालना आसान नहीं होगा। दोनों पक्ष राजनयिक बातचीत और पहले से मौजूद तंत्र के जरिए विवाद को सुलझाने के रास्ते तलाश सकते हैं। इसके अलावा सीमा सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।
सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने पर हो सकता है समझौता
भारत और नेपाल के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना भी इस दौरे का बड़ा एजेंडा हो सकता है। नेपाल चाहता है कि दोनों देशों के बीच सड़क, रेल और हवाई संपर्क को और मजबूत किया जाए। इससे न सिर्फ व्यापार बढ़ेगा, बल्कि पर्यटन को भी फायदा मिलेगा।
नेपाल की तरफ से अतिरिक्त एयर रूट्स और सीमा पार बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की मांग की जा सकती है। डिजिटल कनेक्टिविटी को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा संभव है।
इसके साथ ही जलविद्युत यानी हाइड्रोपावर सेक्टर पर भी खास ध्यान दिया जा सकता है। नेपाल अपनी बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहता है। इसके लिए उसे भारत के निवेश और बेहतर ट्रांसमिशन नेटवर्क की जरूरत है। दोनों देश पहले से चल रही परियोजनाओं की समीक्षा कर सकते हैं और उन्हें जल्द पूरा करने के उपाय तलाश सकते हैं।
नेपाल में बाढ़ से हुए नुकसान पर भारत से मांगी जा सकती है मदद
इस यात्रा के दौरान नेपाल में बाढ़ से हुए नुकसान और पुनर्निर्माण का मुद्दा भी उठ सकता है। इस साल आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। कई इलाकों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है और आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।
ऐसे में नेपाल सरकार भारत से राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में ज्यादा सहयोग की मांग कर सकती है। इसमें क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और दूसरी जरूरी सुविधाओं को दोबारा तैयार करने के लिए आर्थिक और तकनीकी मदद शामिल हो सकती है।
भारत-नेपाल रिश्तों के लिए क्यों अहम है बालेंद्र शाह का दौरा?
कुल मिलाकर बालेंद्र शाह की प्रस्तावित भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने का मौका हो सकती है। व्यापार और निवेश से लेकर सीमा विवाद और सुरक्षा तक, कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर दोनों देशों को मिलकर रास्ता निकालना होगा।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नवंबर में होने वाली संभावित बातचीत के दौरान भारत और नेपाल किन मुद्दों पर सहमति बना पाते हैं और क्या पुराने विवादों को पीछे छोड़कर दोनों देश अपने रिश्तों को नई मजबूती दे पाएंगे।

