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Ram Mandir Donation Controversy: राम मंदिर दान कोष विवाद पर सियासत तेज, अवधेश प्रसाद ने ट्रस्ट पर उठाए सवाल

Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या में प्रभु श्री राम मंदिर के समर्पण निधि और दान कोष से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर देश का सियासी पारा गरमा गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और सांसद अवधेश प्रसाद ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सांसद अवधेश प्रसाद ने सीधे शब्दों में प्रहार करते हुए कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे में जो कुछ भी हुआ है, वह महज कोई वित्तीय घोटाला नहीं बल्कि एक बड़ी ‘डकैती’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान श्री राम के मंदिर में देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित की गई आस्था और चढ़ावे की सरेआम लूटपाट की गई है। सांसद ने इस घटना को भारत के इतिहास की सबसे बड़ी डकैती करार दिया।

अखिलेश यादव ने किया महाघोटाले का पर्दाफाश

सांसद अवधेश प्रसाद ने मीडिया से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि राम मंदिर के इस वित्तीय विवाद और अनियमितताओं को सबसे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उजागर किया था। उन्होंने कहा कि हमारे शीर्ष नेता अखिलेश यादव की ओर से ही इस पूरे महाघोटाले का खुलासा किया गया है, जिसके बाद से ही सत्ता पक्ष में खलबली मची हुई है। अवधेश प्रसाद के अनुसार, समाजवादी पार्टी इस आस्था से जुड़े संवेदनशील मामले को पूरी प्रखरता के साथ जनता के सामने लाती रहेगी ताकि सच सामने आ सके।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सस्पेंड करने की मांग

सपा सांसद ने उत्तर प्रदेश शासन और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शुरुआत में इस पूरे मामले पर लीपापोती करने की पुरजोर कोशिश की गई और राज्य सरकार की तरफ से भी एक लंबी चुप्पी साधे रखी गई। अब जब इस हेराफेरी और वित्तीय अनियमितता की बात पूरी तरह सतह पर आ चुकी है, तो इस गंभीर परिस्थिति में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर देना चाहिए। उनका मानना है कि ट्रस्ट के बने रहते निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच की वकालत

एसआईटी (SIT) जांच के दायरे पर सवाल उठाते हुए अवधेश प्रसाद ने शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य भ्रष्टाचार नहीं बल्कि देश की आस्था का मामला है, इसलिए इस पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट की प्रत्यक्ष देखरेख में एक विशेष न्यायिक कमेटी गठित कर की जानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी कई बड़े और जटिल कानूनी मामलों को सुलझाया है। इस महाघोटाले में भी जब शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों के तहत जांच समिति काम करेगी, तभी ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ हो पाएगा और परत दर परत सच देश के सामने आएगा।

यूपी सरकार की एसआईटी (SIT) जांच पर तकरार

इस राजनीतिक विवाद में अब विपक्षी दल कांग्रेस भी पूरी तरह कूद पड़ी है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि अयोध्या में करोड़ों राम भक्तों की अटूट आस्था के साथ भद्दा खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसे पूरा देश लाइव देख रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि देश की जनता इस कृत्य के लिए किसी को माफ नहीं करेगी और कांग्रेस पार्टी आगामी दो-तीन दिनों के भीतर एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस मामले में महत्वपूर्ण तथ्यों को देश के सामने रखेगी।

राम मंदिर निर्माण समिति का पक्ष

दूसरी तरफ, विपक्ष के इन तीखे हमलों और आरोपों के बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने सरकारी तंत्र का बचाव किया है। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए २४ घंटे से भी कम समय में एक उच्च स्तरीय एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन कर दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस एसआईटी में बहुत ही वरिष्ठ और निष्पक्ष अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिसमें एक डिविजनल कमिश्नर और आईजी स्तर के पुलिस अधिकारी शामिल हैं। मिश्रा ने यह भी रेखांकित किया कि जांच दल का नेतृत्व कर रहे अधिकारियों के पास केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) में लंबे समय तक काम करने का एक गहरा अनुभव है, जिससे जांच की विश्वसनीयता पर कोई सवाल नहीं उठना चाहिए।

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