Brij Bhushan Sharan Singh: भाजपा के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष रहे ब्रजभूषण शरण सिंह न्यायालय से बरी होने के बाद पहली बार वृंदावन स्थित बाराहघाट के आनंदम धाम आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया। आश्रम में दोनों के बीच एकांत वार्ता भी हुई, जिसके बाद ब्रजभूषण शरण सिंह ने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर देश और समाज के कल्याण की कामना की। न्यायालय के फैसले के बाद उनका यह पहला सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रम माना जा रहा है।
न्यायालय से बरी होने के बाद ब्रजभूषण शरण सिंह का आश्रम में हुआ भव्य स्वागत
आनंदम धाम आश्रम में ब्रजभूषण शरण सिंह के पहुंचने पर श्रद्धालुओं और आश्रम से जुड़े लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। स्वागत के दौरान जयघोष और धार्मिक वातावरण देखने को मिला। आश्रम में उन्होंने सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया और कुछ समय तक आध्यात्मिक चर्चा भी की। इसके बाद उन्होंने आश्रम परिसर का भ्रमण किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न की।
ब्रजभूषण शरण सिंह बोले- आरोप एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा थे, न्यायालय ने दिया न्याय
आश्रम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ब्रजभूषण शरण सिंह ने अपने ऊपर लगे यौन शोषण के आरोपों को लेकर कहा कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित षड्यंत्र था। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ जिस तरह का प्रदर्शन हुआ, वैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। उनका कहना था कि आरोप लगाने वाले खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता थे और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कई राजनीतिक दलों तथा विभिन्न संगठनों का समर्थन था।
उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही उनका स्पष्ट रुख था कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में एक भी तथ्य सही साबित होता, तो वह स्वयं सबसे कठोर कदम उठाने को तैयार थे। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आखिरकार न्यायालय ने उन्हें न्याय प्रदान किया।
न्यायालय से बरी होने के बाद धार्मिक आस्था पर जताया भरोसा
ब्रजभूषण शरण सिंह ने कहा कि न्यायालय के अंतिम आदेश से पहले भी वह गुरुपूर्णिमा के अवसर पर नागपुर जाकर सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज के दर्शन और पूजन कर चुके थे। उन्होंने बताया कि न्यायालय द्वारा बरी किए जाने के बाद उनका पहला कार्यक्रम फिर से सद्गुरु के दर्शन का ही रहा। उनके अनुसार कठिन समय में आध्यात्मिक विश्वास और धैर्य ने उन्हें मानसिक मजबूती प्रदान की।
राजनीति में दोबारा सक्रिय होने की संभावना को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि भविष्य का निर्णय ईश्वर की इच्छा पर निर्भर करेगा। उन्होंने इस विषय पर अधिक टिप्पणी करने से परहेज किया।
सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने ब्रजभूषण शरण सिंह को बताया अपना पुत्र
सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने ब्रजभूषण शरण सिंह के आश्रम आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी उन्हें धर्म के मार्ग पर चलते हुए धैर्य बनाए रखने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में संयम और विश्वास बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है।
सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने भावुक शब्दों में कहा कि ब्रजभूषण शरण सिंह उनके लिए पुत्र समान हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसी पिता को अपने पुत्र के सुख और सम्मान से प्रसन्नता होती है, वैसी ही अनुभूति उन्हें भी हो रही है। उन्होंने आशा जताई कि ब्रजभूषण शरण सिंह आगे भी समाज और राष्ट्रहित के कार्यों में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे

