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Parliament session: परिसीमन पर खरगे की पीएम मोदी से चौथी अपील, बोले- विधेयक लाने से पहले सभी दलों से हो चर्चा

Parliament session: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक बार फिर परिसीमन के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। खरगे ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि परिसीमन जैसे बड़े और संवेदनशील मुद्दे पर संसद में कोई व्यापक संवैधानिक संशोधन विधेयक लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों से बात होनी चाहिए। यह इस मामले में प्रधानमंत्री को लिखा गया उनका चौथा पत्र है। इससे पहले वह 11 अप्रैल, 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी ऐसी ही मांग कर चुके हैं।

परिसीमन विधेयक पर सभी दलों को मिले चर्चा का पूरा मौका

खरगे ने अपने पत्र में कहा कि परिसीमन को लेकर सरकार कोई नया प्रस्ताव तैयार करती है, तो उसे संसद में पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तार से चर्चा करनी चाहिए। उनका कहना है कि दलों को अपने विचार रखने, आपस में बातचीत करने और दूसरे संबंधित पक्षों से राय लेने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

खरगे ने प्रधानमंत्री को यह भी याद दिलाया कि पहले भी एक व्यापक संवैधानिक संशोधन विधेयक जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश हुई थी, लेकिन उसे संसद में जरूरी समर्थन नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि इस बार ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बननी चाहिए। परिसीमन के मामले में सभी पक्षों की सहमति और चर्चा जरूरी है।

संसद का सत्रावसान नहीं होने पर खरगे ने उठाए सवाल

खरगे ने संसद के मॉनसून सत्र को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पत्र में कहा कि 13 अगस्त, 2026 को मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के 64 दिन बाद भी लोकसभा और राज्यसभा का सत्रावसान नहीं किया गया है। उन्होंने इस स्थिति को अभूतपूर्व बताया।

संसद का सत्रावसान करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होता है। विपक्षी दलों का कहना है कि सत्रावसान में हो रही देरी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्हें आशंका है कि सरकार परिसीमन से जुड़े विधेयक को दोबारा संसद में लाने के लिए विशेष सत्र बुला सकती है।

अप्रैल में गिर गया था परिसीमन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन विधेयक

खरगे ने अपने पत्र में अप्रैल की घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 11 अप्रैल को पहली बार प्रधानमंत्री से परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था, लेकिन सरकार ने बैठक नहीं की।

इसके बाद 14 अप्रैल, 2026 की देर शाम विधेयकों को सार्वजनिक किया गया और 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। 17 अप्रैल को परिसीमन से संबंधित विधेयक संसद में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया। यह मोदी सरकार का पहला संवैधानिक संशोधन विधेयक था, जिसे संसद में हार का सामना करना पड़ा।

परिसीमन विधेयक दोबारा लाने की अटकलों के बीच विपक्ष की मांग

विधेयक गिरने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार पर्याप्त संख्या बल जुटाकर इसे दोबारा संसद में पेश कर सकती है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक विधेयक फिर से नहीं लाया गया था।

खरगे ने अपने ताजा पत्र में साफ कहा है कि परिसीमन के नए प्रस्तावों पर फैसला लेने से पहले सभी राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए। उनका जोर है कि सरकार किसी भी नए विधेयक को संसद में लाने से पहले व्यापक चर्चा कराए और सभी संबंधित पक्षों को पर्याप्त समय दे। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री विपक्ष की इस चौथी अपील पर क्या कदम उठाते हैं।

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