Asian Games 2026: सहारनपुर की किसान परिवार की बेटी प्राची चौधरी ने 2026 एशियन गेम्स में दो पदक जीतकर अपने शहर और देश का नाम रोशन किया। 400 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने के बाद उन्होंने 4×400 मीटर रिले में भारतीय टीम के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया।
सहारनपुर की बेटी प्राची चौधरी का भव्य स्वागत
जापान के आइची-नागोया में आयोजित 2026 एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करने के बाद प्राची चौधरी शुक्रवार को सहारनपुर पहुंचीं। दिल्ली एयरपोर्ट से लेकर सहारनपुर तक उनके स्वागत में समर्थकों और परिजनों में खासा उत्साह देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों के बीच प्राची का स्वागत किया गया और उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया गया। खुशी के इस मौके पर परिवार के लोगों ने उन्हें कंधों पर बैठाकर जश्न मनाया। जनप्रतिनिधियों और खेल जगत से जुड़े लोगों ने भी प्राची को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई दी।
400 मीटर दौड़ में प्राची चौधरी ने जीता कांस्य पदक
एशियन गेम्स में प्राची चौधरी ने महिलाओं की 400 मीटर व्यक्तिगत दौड़ में 53.21 सेकंड का समय दर्ज कर कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके बाद 4×400 मीटर रिले में उन्होंने भारतीय टीम का हिस्सा बनकर देश को स्वर्ण पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय टीम ने रिले दौड़ को 3 मिनट 29.69 सेकंड में पूरा किया। टीम में प्राची चौधरी के अलावा किरण पहल, एमआर पूवम्मा और विथ्या रामराज शामिल रहीं।
4×400 मीटर रिले में भारत को गोल्ड, प्राची का सपना हुआ पूरा
दो पदक जीतने के बाद प्राची ने इसे अपने जीवन का बेहद खास पल बताया। उन्होंने कहा कि पिछली बार एशियन गेम्स के लिए जाते समय उन्होंने लोगों से अगली बार स्वर्ण पदक लेकर लौटने का वादा किया था। उस दौरान लोगों से मिले आशीर्वाद और प्रोत्साहन को उन्होंने अपनी ताकत बताया। प्राची के मुताबिक, भगवान की कृपा और परिवार व समर्थकों के आशीर्वाद से उनका सपना पूरा हुआ है।
DSP बनने का सपना, गोल्ड मेडल से पहले ही सिलवा ली थी वर्दी
प्राची चौधरी की उपलब्धि के साथ उनका एक निजी सपना भी चर्चा में है। एशियन गेम्स के लिए रवाना होने से पहले ही उन्होंने DSP की वर्दी सिलवा ली थी। प्राची ने बताया कि उत्तर प्रदेश की खेल नीति के तहत स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को DSP पद दिए जाने का प्रावधान है। वह लंबे समय से DSP बनने का सपना देखती रही हैं। अब स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनकी इच्छा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने और उनके सामने DSP की वर्दी पहनने की है।
किसान पिता की बेटी ने सहारनपुर स्टेडियम से शुरू किया सफर
प्राची चौधरी किसान परिवार से आती हैं और उनके खेल सफर की शुरुआत सहारनपुर स्टेडियम से हुई। जिला क्रीड़ा अधिकारी राहुल चोपड़ा के अनुसार, प्रशिक्षकों ने शुरुआती दौर में ही प्राची की प्रतिभा पहचान ली थी। इसके बाद उन्होंने नियमित अभ्यास जारी रखा। सहारनपुर के बाद प्राची ने बेंगलुरु में भी प्रशिक्षण लिया और राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई। इस सफर में उनके माता-पिता और परिवार का अहम योगदान रहा।
रेलवे की नौकरी से अधिकारी बनने तक प्राची की उपलब्धियां
लगातार मेहनत का परिणाम यह रहा कि प्राची को रेलवे में नौकरी मिली। इसके बाद पिछले वर्ष उन्हें जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक दल विकास अधिकारी के पद पर भी नियुक्ति मिली। करीब 12 से 15 वर्षों से खेलों से जुड़ी प्राची ने शुरुआती संघर्षों के बावजूद अभ्यास नहीं छोड़ा। आज उनके हाथ में एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल है, जो उनकी लंबी मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिणाम माना जा रहा है।
बेटियों को आगे बढ़ने का प्राची चौधरी ने दिया संदेश
प्राची ने युवाओं और खासकर बेटियों के माता-पिता से उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देने की अपील की। उन्होंने कहा कि परिवार का सहयोग और प्रोत्साहन मिलने पर बेटियां अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित होकर सफलता हासिल कर सकती हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि खेलों में शुरुआती सफर आसान नहीं था, लेकिन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने प्रशिक्षण और अभ्यास जारी रखा।
अब वर्ल्ड चैंपियनशिप पर प्राची की नजर
एशियन गेम्स में दो पदक जीतने के बाद प्राची चौधरी का अगला लक्ष्य वर्ल्ड चैंपियनशिप है। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए बेहतर प्रदर्शन करने की तैयारी में जुटेंगी। सहारनपुर के स्टेडियम से शुरू हुआ किसान परिवार की बेटी का सफर अब विश्व मंच तक पहुंच चुका है। एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन प्राची की नजर अब अगले अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य पर है।

