Pune Liquor Tragedy: महाराष्ट्र के पुणे जिले से इस वक्त की बेहद दर्दनाक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां जहरीली शराब पीने से 14 बेकसूर लोगों की मौत हो गई है। इस भीषण त्रासदी के बाद गृह विभाग और पुलिस प्रशासन में भारी हड़कंप मच गया है। सरकार ने इस मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए पुणे और पिंपरी-चिंचवड क्षेत्र में कुल 9 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इन पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि इनकी घोर अनदेखी और ढिलाई के कारण ही इलाके में नकली शराब का अवैध धंधा बेखौफ फल-फूल रहा था, जिसने इतने परिवारों को उजाड़ दिया।
अस्पताल में पसरा मातम
इस जहरीली शराब के सेवन से बीमार हुए कई अन्य लोगों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। पुणे के विभिन्न अस्पतालों में बड़ी संख्या में पीड़ित जिंदगी और मौत के बीच गंभीर रूप से जूझ रहे हैं, जहां डॉक्टरों की विशेष टीमें उनके इलाज में जुटी हैं। इस बीच, पुलिस द्वारा की गई शुरुआती जांच में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच टीम के मुताबिक, पुणे के हडपसर और पिंपरी-चिंचवड के डापोडी इलाके में नकली और जानलेवा शराब की बिक्री एक बहुत ही सुनियोजित और बड़े नेटवर्क के जरिए धड़ल्ले से की जा रही थी।
हडपसर थाने पर गिरी गाज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने अपराधियों के साथ-साथ लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी सख्त रवैया अपनाया है। उन्होंने हडपसर पुलिस थाने से जुड़े 3 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंड होने वाले अधिकारियों में सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर मोगले, असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सिकलगर और सब-इंस्पेक्टर (SI) मुलानी के नाम शामिल हैं। इन तीनों अधिकारियों पर अपनी ड्यूटी के दौरान इलाके में नकली शराब की मैनुफैक्चरिंग और बिक्री को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहने का गंभीर आरोप है।
पिंपरी-चिंचवड में सबसे बड़ा प्रहार
दूसरी तरफ, पिंपरी-चिंचवड के पुलिस कमिश्नर ने भी शराब माफिया को शह देने और लापरवाही बरतने वाले मातहतों पर कड़ा हंटर चलाया है। उन्होंने डापोडी पुलिस थाने और उसकी स्थानीय आउटपोस्ट (चौकी) के कुल 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंशन का रास्ता दिखा दिया है। इस बड़ी कार्रवाई की जद में आने वालों में सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर विजय वाघमारे, जांच टीम के प्रमुख और पुलिस सब-इंस्पेक्टर राजू भास्कर के साथ-साथ पुलिसकर्मी जयदीप सोनावणे, नवनाथ पोटे, सागर जाधव और विशाल काले शामिल हैं। यह सभी कर्मी अवैध शराब की तस्करी और बिक्री पर अंकुश लगाने की अपनी मुख्य जिम्मेदारी निभाने में असफल साबित हुए।
कानून का कड़ा संदेश
उच्च पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि इस हत्याकांड के दोषियों और अवैध धंधेबाजों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। ड्यूटी में जरा सी भी कोताही बरतने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। आपको बता दें कि इस भीषण शराब कांड के उजागर होते ही पिंपरी-चिंचवड पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर 9 संदिग्ध आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि पूरे रैकेट को नेस्तनाबूद करने के लिए विस्तृत जांच जारी है, और आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां तथा पुलिस महकमे में और भी सस्पेंशन देखने को मिल सकते हैं।

