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Ram Mandir Donation Row: चंपत राय पर भड़के शंकराचार्य, राम मंदिर दान को लेकर उठाए गंभीर सवाल

Ram Mandir Donation Row: अयोध्या राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान के रुपयों में कथित हेरफेर का मामला अब गरमा गया है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस विवाद पर बेहद आक्रामक बयान दिया है। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम लेकर उन पर सीधा तंज कसा। शंकराचार्य ने व्याकरण का हवाला देते हुए कहा, “चम्प एक धातु है, जिससे ‘चंपत’ शब्द बना है और इसका मतलब होता है—लेकर भाग जाना। यानी जो लेकर भाग गए, वो चंपत हो गए।” उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में भूमिपूजन और शिलापूजन के समय से ही निरंतर वित्तीय गड़बड़ियां और कथित चोरी हो रही हैं।

अयोध्या जमीन खरीद विवाद और भ्रष्टाचार के आरोप

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मंदिर निर्माण की शुरुआत से ही पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पुराने विवादों को याद दिलाते हुए कहा कि यह चोरी कोई आज की बात नहीं है, बल्कि शुरुआत से ही वहां ऐसा खेल चल रहा है जहां दो-दो मिनट के भीतर लाख रुपये की कीमत वाले प्लॉट करोड़ों रुपये के हो जाते थे। शंकराचार्य का स्पष्ट मानना है कि दान के पैसों में हेराफेरी की बातें खुद अंदर से ही निकलकर बाहर आ रही हैं, जिसे अब दबाया नहीं जा सकता।

धार्मिक संतों की न्यायिक जांच की मांग

इस महाविवाद में अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास भी कूद पड़े हैं। उन्होंने ट्रस्ट के पदाधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा, लेकिन जिसकी कभी साइकिल पर चलने की हैसियत नहीं थी, आज उनकी बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें खड़ी हो गई हैं।” कमल नयन दास ने कहा कि इस पूरे प्रकरण से अयोध्या और मंदिर की बहुत बदनामी हो रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ईमानदारी पर भरोसा जताते हुए इस पूरे घोटाले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच और दोषियों को कड़ा दंड देने की मांग की है।

विपक्ष का लेखा-जोखा और ऑडिट पर सवाल

इस धार्मिक विवाद की पटकथा हाल ही में समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक बयान से शुरू हुई थी। अखिलेश यादव ने दावा किया था कि राम मंदिर में देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चढ़ावे का कोई साफ हिसाब-किताब नहीं है और भारी-भरकम राशि गायब है। हालांकि, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने विपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। चंपत राय ने सफाई दी थी कि मंदिर का सारा लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी है और नियमित रूप से ऑडिट किया जा रहा है। इसके बावजूद, सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक विपक्ष और आम जनता उनके इस जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आ रही है।

केंद्र और योगी सरकार की सख्त निगरानी

मामले की संवेदनशीलता और इसके राष्ट्रव्यापी असर को देखते हुए अब केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राज्य सरकार दोनों ही पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रही हैं। चूंकि अयोध्या का राम मंदिर देश के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों और भक्तों की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र है, इसलिए चढ़ावे की राशि और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठ रहे इन गंभीर सवालों को सरकारें हल्के में नहीं ले रही हैं। दोनों ही स्तरों पर इस पूरे घटनाक्रम और संतों के बयानों पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह से जन-आस्था को ठेस न पहुंचे।

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