UP News: अयोध्या से चित्रकूट को जोड़ने वाले राम वन गमन पथ की सड़क निर्माण के करीब एक साल बाद ही क्षतिग्रस्त होने पर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। प्रयागराज में तैनात PWD के अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह को निलंबित कर दिया गया है, जबकि अधीक्षण अभियंता ओंकार भारतीय के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
राम वन गमन पथ पर दरार और सड़क टूटने से हड़कंप
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम वन गमन मार्ग की खराब गुणवत्ता और सड़क में आई दरारों की शिकायत पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित हिस्सों की तत्काल मरम्मत कराने और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित निर्माण एजेंसी के खिलाफ भी कार्रवाई करने को कहा गया।
प्रयागराज में 1.5 किलोमीटर सड़क पर मिली खामियां
जांच के दौरान प्रयागराज में अवतारपुर से सिंगरौर उपरहार के बीच राम वन गमन पथ के कई हिस्सों में दरारें और क्षति पाई गई। करीब 1.5 किलोमीटर हिस्से में सड़क की किनारी पटरी और ढलान से संबंधित खामियां सामने आईं। इसके अलावा लगभग 500 मीटर हिस्से में हाईवे के किनारे किए गए सुरक्षात्मक कार्य भी क्षतिग्रस्त मिले।
श्रृंगवेरपुर धाम के पास भी करीब 350 मीटर सड़क में दरार और धंसने की शिकायत सामने आई थी। निर्माण पूरा होने के महज एक साल के भीतर सड़क की हालत खराब होने से निर्माण गुणवत्ता और PWD की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।
PWD अधिकारियों पर गिरी कार्रवाई की गाज
जांच में परियोजना की निगरानी में लापरवाही के लिए PWD अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई। शासन ने प्रयागराज के अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उन्हें प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग के कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
वहीं अधीक्षण अभियंता ओंकार भारतीय के खिलाफ भी पर्याप्त निगरानी नहीं करने के आरोप में नियम-7 के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की जांच के लिए मुख्य अभियंता, वाराणसी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
राम वन गमन मार्ग के ठेकेदार और क्वालिटी एजेंसी पर भी शिकंजा
योगी सरकार की कार्रवाई का दायरा केवल PWD अधिकारियों तक सीमित नहीं है। राम वन गमन पथ का निर्माण करने वाली एजेंसी के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संबंधित ठेकेदार को डिबार करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा परियोजना की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली थर्ड पार्टी एजेंसी एलएन मालवीय इंफ्रा भी जांच के घेरे में है। एजेंसी के खिलाफ एक साल के लिए डिबार करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात सामने आई है।
मुख्य अभियंता पवन वर्मा की भी बढ़ीं मुश्किलें
इसी बीच प्रतिनियुक्ति पर तैनात रहे PWD के मुख्य अभियंता पवन वर्मा के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। उनकी प्रतिनियुक्ति पहले ही समाप्त कर उन्हें प्रमुख अभियंता कार्यालय से संबद्ध किया जा चुका है।
यह कार्रवाई भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण में उनकी पूर्व तैनाती से जुड़े मामले में बताई जा रही है। बेयर बोट चार्टरिंग अनुबंध के क्रियान्वयन में कथित वित्तीय अनियमितताओं और पोस्ट डेटेड चेक बाउंस होने के बावजूद समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं किए जाने के आरोपों की जांच होगी। शासन ने नियम-7 के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
उद्घाटन से पहले राम वन गमन पथ की गुणवत्ता पर सवाल
अयोध्या से चित्रकूट तक प्रस्तावित राम वन गमन पथ धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना मानी जाती है। ऐसे में निर्माण के कुछ समय बाद ही सड़क में दरार, धंसाव और सुरक्षात्मक कार्यों के क्षतिग्रस्त होने से परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
योगी सरकार ने संकेत दिया है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। ताजा कार्रवाई से यह भी स्पष्ट है कि राम वन गमन पथ मामले में जिम्मेदारी तय करने के साथ निर्माण एजेंसी और गुणवत्ता निगरानी से जुड़ी संस्थाओं पर भी कार्रवाई का दायरा आगे बढ़ सकता है।

