Vande Mataram Row: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में राष्ट्रगीत के शुरुआती दो पद गाए जाने के प्रस्ताव के बाद दोनों दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इसी सिलसिले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुरुवार को BJP और RSS पर तीखा हमला बोला।
पवन खेड़ा का BJP पर निशाना, वंदे मातरम को लेकर उठाए सवाल
मीडिया से बातचीत में पवन खेड़ा ने BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि आज कुछ लोग कांग्रेस को ‘वंदे मातरम’ का महत्व समझाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। खेड़ा ने अपने बयान में महात्मा गांधी और स्वतंत्रता आंदोलन के कई प्रमुख नेताओं का भी जिक्र किया।
खेड़ा ने कहा कि गोडसे और सावरकर के परिवार के सदस्यों की ओर से हाल में की गई कथित स्वीकारोक्ति का हवाला देते हुए उन्होंने RSS से जुड़े पुराने विवादों को भी उठाया। कांग्रेस नेता ने इसी संदर्भ में BJP पर सवाल खड़ा किया कि जो लोग स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस के प्रमुख नेताओं के विरोध में थे, वे अब पार्टी को राष्ट्रगीत का महत्व क्यों समझा रहे हैं।
‘वंदे मातरम’ के दो पदों के प्रस्ताव पर BJP का कांग्रेस पर हमला
दरअसल, बुधवार को हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में पार्टी ने अपने आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो पद गाने के 1937 के प्रस्ताव को लागू करने का फैसला किया। कांग्रेस के इस निर्णय के बाद BJP ने इसे लेकर सवाल उठाए और पार्टी पर राजनीतिक तुष्टीकरण के आरोप लगाए।
BJP नेताओं का कहना है कि राष्ट्रगीत को लेकर कांग्रेस का यह फैसला उसकी राजनीतिक सोच को दर्शाता है। वहीं कांग्रेस का तर्क है कि शुरुआती दो पद गाने का फैसला ऐतिहासिक प्रस्ताव के अनुरूप है और इसे किसी धार्मिक या राजनीतिक विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
पवन खेड़ा ने स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं का किया जिक्र
BJP के आरोपों का जवाब देते हुए पवन खेड़ा ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान RSS की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर, सी. राजगोपालाचारी, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि आज ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाने वाले लोग उस दौर के इतिहास को भी देखें।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान RSS का इन प्रमुख नेताओं के साथ वैचारिक मतभेद रहा था। उन्होंने कहा कि आज वही लोग कांग्रेस को राष्ट्रगीत के बारे में ज्ञान देने की कोशिश कर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने BJP और उसके वैचारिक सहयोगियों पर तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या अब वे कांग्रेस को ‘वंदे मातरम’ का महत्व बताएंगे।
कांग्रेस महासचिव वेणुगोपाल बोले- राष्ट्रगीत हमारे लिए भावनात्मक मुद्दा
इस विवाद के बीच कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत कांग्रेस के लिए भावनात्मक मुद्दे हैं, जबकि BJP इन्हें राजनीतिक मुद्दे के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। वेणुगोपाल के बयान से साफ है कि कांग्रेस इस विवाद को केवल गायन के तरीके तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे राजनीतिक और वैचारिक बहस के रूप में भी देख रही है।
BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पर लगाया तुष्टीकरण का आरोप
दूसरी ओर, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि कांग्रेस तुष्टीकरण की राजनीति के लिए देश के स्वाभिमान से समझौता कर रही है। BJP की ओर से कांग्रेस के निर्णय को राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं।
BJP के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी कांग्रेस पर हमला करते हुए गंभीर राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की मौजूदा राजनीति में बदलाव आ गया है और पार्टी पर मुस्लिम लीग जैसी राजनीति करने का आरोप लगाया।
वंदे मातरम विवाद पर आगे भी जारी रह सकती है सियासी बयानबाजी
‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो पदों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और BJP के बीच व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। एक तरफ कांग्रेस इसे ऐतिहासिक प्रस्ताव और राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान से जोड़ रही है, वहीं BJP इसे तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति का मुद्दा बता रही है। दोनों दलों के नेताओं के लगातार सामने आ रहे बयानों को देखते हुए आने वाले दिनों में यह विवाद और गरमाने के आसार हैं।

